आयकर विभाग एवं आईसीएआई भीलवाड़ा शाखा का संयुक्त जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भीलवाड़ा । आयकर विभाग, भीलवाड़ा एवं इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की भीलवाड़ा शाखा के संयुक्त तत्वावधान में टीडीएस प्रावधानों में प्रमुख संशोधन, करेक्शन स्टेटमेंट की अंतिम समय-सीमा तथा आयकर अधिनियम, 2025 के महत्वपूर्ण प्रावधानों पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन आईसीएआई भवन, पटेल नगर, भीलवाड़ा में किया गया।
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में इंकम टैक्स ऑफिसर (TDS) भीलवाड़ा दिलीप राठौड़ ने टीडीएस प्रावधानों में किए गए महत्वपूर्ण संशोधनों, करेक्शन स्टेटमेंट की अंतिम समय-सीमा, आयकर अधिनियम, 2025 के प्रावधानों तथा उनके व्यावहारिक प्रभावों पर विस्तृत प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 397(3)(f) के अनुसार पूर्व वित्तीय वर्षों के TDS/TCS करेक्शन स्टेटमेंट दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। 1 अप्रैल 2026 से निम्नलिखित अवधियों के लिए आयकर विभाग का सिस्टम करेक्शन स्टेटमेंट स्वीकार नहीं करेगा —
प्रभावित वित्तीय वर्ष:
वित्तीय वर्ष 2018–19 → केवल चौथी तिमाही (Q4)
वित्तीय वर्ष 2019–20 → सभी तिमाहियाँ
वित्तीय वर्ष 2020–21 → सभी तिमाहियाँ
वित्तीय वर्ष 2021–22 → सभी तिमाहियाँ
वित्तीय वर्ष 2022–23 → सभी तिमाहियाँ
वित्तीय वर्ष 2023–24 → प्रथम से तृतीय तिमाही (Q1 से Q3)
यदि चालान मिसमैच, पैन (PAN) त्रुटि, शॉर्ट डिडक्शन/डिफॉल्ट अथवा अनमैच्ड एंट्री लंबित है, तो 31 मार्च 2026 से पूर्व उसका सुधार अनिवार्य रूप से किया जाना अपेक्षित है। निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुधार न करने पर स्थायी डिमांड, व्यय की अस्वीकृति, ब्याज एवं दंड की कार्यवाही तथा लाभार्थियों (Deductees) को कर-क्रेडिट प्राप्त करने में कठिनाई उत्पन्न हो सकती है।
कार्यक्रम में यह भी अवगत कराया गया कि पूर्व में करेक्शन स्टेटमेंट सामान्यतः छह वर्षों तक दाखिल किए जा सकते थे, किंतु अब यह अवधि घटाकर मूल स्टेटमेंट दाखिल करने की तिथि से दो वर्ष कर दी गई है। अतः कटौतीकर्ताओं के लिए समय रहते त्रुटियों का निराकरण करना अत्यंत आवश्यक हो गया है, अन्यथा भविष्य में त्रुटियाँ स्थायी रूप से सुधार के दायरे से बाहर हो सकती हैं।
सत्राध्यक्ष सीए जी.पी. सिंघल ने कहा कि टीडीएस कर कानूनों में निरंतर हो रहे परिवर्तनों के मद्देनज़र सदस्यों का अद्यतन ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसी शैक्षणिक संगोष्ठियाँ सदस्यों की पेशेवर दक्षता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने सभी व्यवसायियों एवं कर सलाहकारों से अपील की कि वे अपने TDS/TCS अभिलेखों की तत्काल समीक्षा कर आवश्यक सुधार सुनिश्चित करें।
शाखा अध्यक्ष दिनेश सुथार ने बताया कि आयकर अधिनियम, 2025 से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा से सदस्यों को व्यावहारिक कार्य में विशेष लाभ प्राप्त होगा तथा भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।
सचिव सीए पुलकित राठी ने बताया कि कार्यक्रम में सीए के.सी. अजमेरा, सीए अतुल सोमानी, सीए बी.बी. गुप्ता, सीए आर.एल. बिरला, सीए प्रदीप बंसल, सीए आलोक सोमानी, सीए अक्षय सोडानी, सीए दिनेश आगाल, सीए पुनीत मेहता, सीए सत्यनारायण लाठी, सीए नरेश जागेटिया, सीए अमित सेठ सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आयकर विभाग से आए नवीन बंसल, मनोज कुमार एवं विशाल बैरवा भी मौजूद थे।
