भगवानपुरा में जल झूलनी एकादशी: भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा स्वरूप सागर तालाब

भगवानपुरा में जल झूलनी एकादशी: भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा स्वरूप सागर तालाब
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भगवानपुरा, (कैलाश शर्मा)

प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी जल झूलनी एकादशी के पावन अवसर पर भगवानपुरा गांव भक्ति और उल्लास के रंगों में डूब गया। गांव के सभी मंदिरों से भगवान के विग्रहों को बैवाण में विराजित कर बैंड-बाजों की स्वरलहरियों के साथ नाचते-गाते भक्तगण स्वरूप सागर तालाब पहुंचे। इस दौरान आयोजित विशाल भजन संध्या ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

भजन संध्या में भक्तों का उत्साह





भजन संध्या में सम्पत लाल सोडाणी, श्यामलाल तेली, मदन गिरी, बंशीलाल भाटी, लादुलाल तेली, मदन लाल तेली, मदन लाल पुरोहित, गोपाल तिवाड़ी, प्रेमचंद तेली, कान्हा सेन, रामकिशोर सोमाणी, घनश्याम सोमाणी और कई अन्य भक्तों ने एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत किए। इन भजनों ने श्रद्धालुओं के बीच आध्यात्मिक उमंग का संचार किया और तालाब के किनारे का माहौल भक्ति से सराबोर हो गया।

जल विहार और प्रसाद वितरण

भगवान को जल में झुलाने के बाद उनकी आरती की गई और प्रसाद वितरण का आयोजन हुआ। भक्तों ने 351 किलो हरी सेव के साथ-साथ मैंगो, लेमन और ऑरेंज जूस, फ्रूटी, आइसक्रीम और आगरे के पेठे का प्रसाद वितरित किया। इस अवसर पर वाटर सप्लायर्स द्वारा पानी की केन और टेंट व्यवसाइयों द्वारा टेंट की निःशुल्क व्यवस्था की गई, जिसने आयोजन को और सुचारू बनाया।

शोभायात्रा और भक्ति का संगम

जल विहार के बाद सभी भगवान के विग्रहों को भक्तों के कंधों पर बैवाण में विराजित कर उनके मूल मंदिरों में वापस ले जाया गया। इस दौरान भक्त नाचते-गाते और भजन-कीर्तन करते हुए शोभायात्रा में शामिल रहे। मंदिरों में पहुंचने पर पुनः आरती और प्रसाद वितरण के साथ उत्सव का समापन हुआ।

पारंपरिक व्यंजनों ने बढ़ाया उत्सव का स्वाद

जल झूलनी एकादशी के इस खास दिन पर गांव के घरों में चूरमा-बाटी, खीर और मालपुए जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए गए, जिन्होंने उत्सव के आनंद को और बढ़ा दिया।

भक्ति और सामुदायिक एकता का प्रतीक

यह आयोजन न केवल भक्ति का प्रतीक रहा, बल्कि सामुदायिक एकता और सहयोग का भी शानदार उदाहरण प्रस्तुत किया। भगवानपुरा के भक्तों ने अपनी श्रद्धा और उत्साह के साथ इस पर्व को अविस्मरणीय बना दिया।

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