झांतला माता धाम: आस्था और आरोग्य का संगम, पैरालिसिस जैसे रोगों से मुक्ति की है अटूट मान्यता

भीलवाड़ा | जिले की कोचरिया ग्राम पंचायत के सालमपुरा के घने जंगलों में स्थित झांतला माता मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। जंगलों के बीच स्थित होने के कारण स्थानीय लोग इसे श्रद्धा से 'बीड़ा की माताजी' के नाम से भी पुकारते हैं। यह प्राचीन और चमत्कारी धाम समूचे क्षेत्र के प्रमुख शक्तिपीठों में अपनी एक विशिष्ट पहचान रखता है।
असाध्य रोगों से मुक्ति का विश्वास
जनमान्यता है कि झांतला माता के दरबार में सच्चे मन से हाजिरी लगाने पर न केवल मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, बल्कि गंभीर रोगों से भी मुक्ति मिलती है। मंदिर के पुजारी के अनुसार, यहाँ विशेष रूप से पैरालिसिस (लकवा) जैसे रोगों से पीड़ित लोग बड़ी संख्या में आते हैं। शनिवार, रविवार और नवरात्रि के दौरान यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है, जहाँ श्रद्धालु नौ दिनों तक माता की परिक्रमा कर स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं। कई भक्त यहाँ से आरोग्य होकर लौटने का दावा भी करते हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक महत्व
प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह धाम पुर से करीब 5 किमी और दरीबा से लगभग 3 किमी की दूरी पर स्थित है। यहाँ प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास की शुक्ला नवमी को विशाल मेला भरता है, जिसमें दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु पहुँचते हैं। मंदिर तक पहुँचने के लिए NH-48 से 6 किमी और कोचरिया चौराहे (NH-758) से करीब 8 किमी का सफर तय करना पड़ता है।
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