ज्ञान ही सुख और सुकून का मार्ग, मुनि महाराज का प्रवचन भीलवाड़ा में

भीलवाडा । कालिदास जब तक अज्ञानी था तो जिस डाल पर बैठा था, उसी को काट रहा था। ज्ञान ने उसका नाम शताब्दियों के लिए अमर कर दिया। सुख एवं सुकून की खोज का अगला पायदान ज्ञान है। अज्ञानी व्यक्ति भौतिक संसार में भी तिरस्कार का पात्र होता है और आध्यात्मिक रूप से तो संसार के परिभ्रमण में ही फंसा रहता है। ज्ञान केवल किताबी ज्ञान नही होता बल्कि बौद्धिक ज्ञान हो जो कि आपकी प्रज्ञा को सभी आयामों में विकसित करे। आप दक्षिण भारत गये और कन्नड, तेलगू आदि भाषाओं का ज्ञान है तो वहां के व्यक्ति आपको अपने समान समझ कर व्यवहार करेगे। यह बात पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज के परमप्रभावी शिष्य श्रुंतसंवेगी मुनि आदित्यसागर महाराज ने तरण ताल परिसर में शुक्रवार को प्रवचन के दौरान कही।

महाराज ने कहाकि आज के व्यक्ति कुछ किताबे एवं शास्त्र पढ़ लेने से अपने आपको पण्डित समझने लगते है। जैन धर्म के अनुसार छटवें गुण स्थान में पहुंच दिगम्बर मुनि जिन्हें अपने आत्मस्वरुप का ज्ञान हो जाता वे ही पण्डित कहलाने के योग्य है। भौतिक रूप से भी ज्ञान के इतने विशाल आयाम है कि एक व्यक्ति अपने जीवन में कभी पूर्ण ज्ञानी नही हो सकता। आइंस्टीन एक महान वैज्ञानिक थे लेकिन उनकी पालतु बिल्ली जब बच्चा हुआ तो उन्होंने खाती को बुलाकर छोटी बिल्ली के लिए छोटा छेद बनाने की कहा। खाती ने जब उन्हें समझाया कि बिल्ली वाले छेद से तो छोटा बच्चा भी निकल सकता, तो उन्होंने अपना माथा पकड़ लिया।

ट्रस्ट के उपाध्यक्ष चैनसुख शाह ने बताया कि शनिवार से मुनि संघ के सानिध्य में तीन दिवसीय भक्तामर विधान आराधना प्रारम्भ होगी, जिसका झण्डारोहण दिन में सवा बारह बजेे चान्दबाई, नरेश, नितिन, पीयूष गोधा करेगें। विधान के सौधर्म इन्द्र एवं शची इन्द्रानी के रुप में शांतिलाल मंजू शाह प्रमुख भूमिका निभाएगें। ओम चंद रिखबचंद बाकलीवाल परिवार कुबेर इन्द्र के रूप में रत्न वृष्टि करेगें। शुभम काला चक्रवर्ती, अभिषेक पाटनी, बाहुबली के रूप में आदिनाथ भगवान की आराधना करेगें। उन्होंने बताया कि विधान में 300 से अधिक श्रावक-श्राविकाएं भी सम्मिलित होगें

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