गुलमंडी में कोड़ामार होली की धूम: 200 साल पुरानी परंपरा के साथ जीनगर समाज ने मनाया रंगतेरस का उत्सव

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भीलवाड़ा। पुराने शहर के सर्राफा बाजार स्थित गुलमंडी में आज रंगतेरस के पावन अवसर पर जीनगर समाज द्वारा पारंपरिक कोड़ामार होली का भव्य आयोजन किया गया। वीरांगनाओं के बलिदान की स्मृति में मनाया जाने वाला यह 200 साल पुराना उत्सव न केवल शहर, बल्कि आसपास की कॉलोनियों और बस्तियों के लोगों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।

15 हजार लीटर रंगीन पानी और कोड़ों की मार

उत्सव की शुरुआत दोपहर 12 बजे हुई। आयोजन स्थल पर चार बड़े कड़ाव रखे गए, जिनमें लगभग 15 हजार लीटर पानी और 20 किलो गुलाल-रंग घोला गया। परंपरा के अनुसार, महिलाएं इन कड़ाव की सुरक्षा के लिए हाथों में कपड़े से बने विशेष 'कोड़े' लेकर तैनात रहीं। जैसे ही पुरुषों ने डोलची (चमड़े का पात्र) से महिलाओं पर पानी फेंकने का प्रयास किया, महिलाओं ने कोड़ों से प्रहार कर उन्हें करारा जवाब दिया। दोपहर 2 बजे तक चलने वाले इस रोमांचक खेल के दौरान कड़ाव को कई बार पानी से भरा गया।

बैरवा मोहल्ला से ढोल की थाप पर पहुंची महिलाएं

इससे पूर्व, सुबह समाज की महिलाएं बैरवा मोहल्ला में एकत्रित हुईं। वहां से वे हाथों में कपड़े के कोड़े लिए ढोल की थाप पर थिरकती हुई सामूहिक रूप से गुलमंडी पहुंचीं। सर्राफा बाजार पहुंचने पर समाज के पुरुषों और अन्य सदस्यों ने हंसी-ठिठोली के साथ उनका भव्य स्वागत किया।

डीजे की धुन पर थिरके समाजजन

कोड़ामार होली के दौरान तेज आवाज में डीजे पर बज रहे फिल्मी गीतों और भजनों पर समाज के युवाओं और महिलाओं ने जमकर नृत्य किया। कई राउंड के रोमांचक खेल के बाद कार्यक्रम के समापन की घोषणा की गई। इसके पश्चात सभी समाजजन ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते हुए समाज के नोहरे पहुंचे, जहां स्वल्पाहार के बाद सभी अपने घरों को लौटे। आयोजन समिति के अनुसार, आज शाम को भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा।

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