श्री कुंज में धूमधाम से मनाया गया कृष्ण जन्मोत्सव, 'नानी बाई का मायरा' में उमड़ा भक्ति का सैलाब

श्री कुंज में धूमधाम से मनाया गया कृष्ण जन्मोत्सव, नानी बाई का मायरा में उमड़ा भक्ति का सैलाब
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​भीलवाड़ा। ग्रीन पार्क स्थित 'श्री कुंज' में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दौरान रविवार को भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव (नंदोत्सव) अत्यंत धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जैसे ही भगवान श्री कृष्ण के प्राकट्य का प्रसंग आया, पूरा पांडाल 'नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। कथा व्यास निंबार्क आश्रम (वृंदावन) के महंत मोहनशरण शास्त्री के सानिध्य में बाल कृष्ण के दर्शन के लिए श्रद्धालु लालायित दिखे। इस खुशी के अवसर पर भक्तों द्वारा जमकर पुष्प वर्षा की गई और बधाइयां, फल व टॉफियां वितरित की गईं। "मनुष्य जन्म अनमोल रे" जैसे भजनों पर भक्त भाव-विभोर होकर झूम उठे।

​आयोजन प्रमुख शंभूदयाल सोनी व प्रहलाद सोनी ने बताया कि कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान संकट मोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबू गिरी, हाथी भाटा आश्रम के मंहत संतदास, पंचमुखी बालाजी रीको के महंत जमुनादास (लाल बाबा), कोटडी के संत लाल दास, पंचमुखी बालाजी रीको के पुजारी मुरारी पांडे एवं सामाजिक कार्यकर्ता मधुबाला महाजन सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। युवा ब्रह्म शक्ति मेवाड़ की महिला प्रदेश अध्यक्ष नीलम शर्मा और जिला अध्यक्ष कमलेश पालीवाल के नेतृत्व में गोपाल नारायण नागर, अर्पणा, पिंकी, वन्दना शर्मा एवं निकिता सहित अन्य महिला पदाधिकारियों ने महाराज श्री का अभिनंदन किया। इसी क्रम में श्री निम्बार्क परमार्थिक सेवा ट्रस्ट की ओर से सचिव रणजीत सिंह कारोही, कोषाध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा, राकेश शर्मा, जिला अध्यक्ष केसी (कैलाश) अरोड़ा, दीपिका शर्मा, दीपिका अरोड़ा एवं ममता चिरानिया ने संत श्री एवं यजमान परिवार का भावभीना स्वागत एवं सत्कार किया। व्यास पीठ का पूजन श्याम सुंदर, अक्षत सोनी व अन्य अतिथियों द्वारा किया गया। मंच संचालन हंसा व्यास ने किया। व्यवस्थाओं में सोम शर्मा का विशेष योगदान रहा। कथा के अंत में पुर दशम सेवा समिति के सदस्यों ने महाकाल की तर्ज पर महा आरती की। सोमवार को श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया जाएगा। भगवान की माखन फोड़ लीला होगी।

​'नानी बाई का मायरा' में बरसी प्रेम की वर्षा

भक्ति महोत्सव के अंतर्गत आयोजित 'नानी बाई का मायरा' के दूसरे दिन भक्ति की पराकाष्ठा देखने को मिली। कथा व्यास गोवत्स शिव प्रकाश शास्त्री ने नरसी मेहता के जीवन प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि परमात्मा को पाने के लिए छप्पन भोग या स्वर्ण मुद्राओं की आवश्यकता नहीं है, वे तो भक्त के केवल दो आंसू और निस्वार्थ प्रेम के भूखे हैं।

​शास्त्री जी ने भावुक स्वर में कहा कि जब नरसी मेहता के पास मायरा भरने के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं थी, तब भी उनका विश्वास हिमालय जैसा अडिग था। उन्होंने भक्तों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि दुनिया भले ही आपका साथ छोड़ दे, लेकिन जो भगवान के भरोसे रहता है, उसका 'मायरा' स्वयं सांवरिया सेठ भरकर जाते हैं। "भरियो रे श्याम म्हारो मायरो" जैसे भजनों पर पांडाल में उपस्थित हर श्रद्धालु की आंखें नम हो गईं और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। यह कथा प्रतिदिन रात्रि 7:30 से 9:30 बजे तक आयोजित किया जा रहा है।

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