बिलियां कलां में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी फिर बनी जानलेवा, ग्रामीणों में आक्रोश

हमीरगढ़ (अल्लाउद्दीन मंसुरी)। ग्रामीण अंचलों में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। हमीरगढ़ उपखण्ड क्षेत्र के बिलियां कलां गांव में छत से गिरकर घायल हुए 15 वर्षीय छात्र बाबू पुत्र रमेशनाथ योगी की इलाज के अभाव में मौत हो गई। हादसे के बाद करीब ढाई घंटे तक समुचित उपचार न मिल पाने को ही उसकी मौत का मुख्य कारण माना जा रहा है।जानकारी के अनुसार बाबू शुक्रवार को छत पर पतंग उड़ाते समय संतुलन बिगड़ने से नीचे गिर गया। गिरने से उसके सिर व शरीर में गंभीर चोटें आईं और अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया।गांव में स्थित प्राथमिक उपस्वास्थ्य केन्द्र जर्जर हालत में होने और वहां उपचार की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण परिजनों को उसे जिला चिकित्सालय ले जाना पड़ा।ग्रामीणों का आरोप है कि घायल छात्र को अस्पताल पहुंचाने में दो से ढाई घंटे का कीमती समय लग गया। इस दौरान लगातार ब्लीडिंग होती रही, जिससे उसकी हालत और बिगड़ती चली गई। जिला चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल रेफर किया,जहां वह तीन दिन तक जिंदगी और मौत से जूझता रहा,लेकिन अंततः इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।सोमवार को बिलियां कलां श्मशान घाट पर नम आंखों से उसका अंतिम संस्कार किया गया। मासूम की मौत के बाद गांव में शोक के साथ-साथ गुस्से का माहौल भी देखने को मिला। ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि गांव में ही प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध होती,तो शायद छात्र की जान बचाई जा सकती थी।ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली को लेकर वे कई बार जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को अवगत करवा चुके हैं,लेकिन हर बार आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।यही लापरवाही अब एक होनहार छात्र की जान ले गई।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्राथमिक उपस्वास्थ्य केन्द्र को दुरुस्त कर आवश्यक चिकित्सा उपकरण व स्टाफ की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। यह घटना ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की सच्चाई को उजागर करती है,जहां समय पर इलाज आज भी कई जिंदगियों के लिए सपना बना हुआ है।
