live कचहरी का गेट हो या अस्पताल का दरवाजा, संकट में केवल महादेव ही साथ खड़े मिलते हैं: पंडित प्रदीप मिश्रा
भीलवाड़ा |संकट मोचन हनुमान मंदिर द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन व्यासपीठ से सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने भक्ति और भरोसे की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने जीवन की शुरुआत में अक्सर ईश्वर की आराधना से बचने के बहाने ढूंढता है, लेकिन जीवन के अंतिम सत्य और कठिन समय में केवल शिव ही एकमात्र सहारा होते हैं।
विपत्ति में साथ छोड़ देते हैं अपने, शिव थामते हैं हाथ*
पंडित मिश्रा ने भावुक अपील करते हुए कहा कि जब इंसान पर भारी संकट या विपदा की घड़ी आती है, तो जिन्हें वह अपना समझता है, वे अक्सर दूर खड़े नजर आते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया, "इंसान कचहरी के चक्कर लगाता है, सबको फोन लगाता है, लेकिन कोई आकर खड़ा नहीं होता। ऐसे में याद रखना कि कचहरी का गेट हो, अस्पताल का दरवाजा हो या दुख की घड़ी—जो आपके साथ खड़ा मिले, वही आपका अपना है, और वह महादेव ही हैं।"
पांडाल खचाखचे, महिलाओं की भारी भीड़
गर्भ से लेकर श्मशान तक का साथ**
कथा के दौरान उन्होंने कहा कि भगवान शिव गर्भ से लेकर मृत्यु की शैय्या तक भक्तों के साथ रहते हैं। जब दुनिया साथ छोड़ देती है, तब औघड़दानी ही भक्त का हाथ पकड़कर उसे संकट से उबारते हैं। उन्होंने भक्तों को प्रेरित किया कि दिखावे की भक्ति के बजाय अंतर्मन से शिव को पुकारें, क्योंकि वह पिता की तरह हमेशा अपने बच्चों के आसपास ही वास करते हैं।
शिव महापुराण कथा: रिश्तेदार वह जो दुख में साथ खड़ा हो, खुद भगवान बनने की कोशिश न करें भक्त - पंडित प्रदीप मिश्रा
संकट मोचन हनुमान मंदिर के सानिध्य में आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने रिश्तों की मर्यादा और भक्ति के मर्म पर गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने भीलवाड़ा के श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि केवल खून का रिश्ता होने से कोई रिश्तेदार नहीं हो जाता, बल्कि जो आपके कठिन समय में काम आए, वही असली संबंधी है।
रिश्तों की परीक्षा: जब दुकान बिकती है, तब सगा ही क्यों खड़ा होता है?
पंडित मिश्रा ने समाज की कड़वी सच्चाई को उजागर करते हुए कहा, "जब किसी की दुकान या मकान बिकता है, तो उसे बचाने के लिए कोई बाहरी नहीं आता। अक्सर सगा भाई ही उसे खरीदने के लिए सबसे पहले खड़ा होता है।" उन्होंने सीख दी कि अगर आपका कोई रिश्तेदार या पड़ोसी तकलीफ में है, उसके बच्चे पढ़ नहीं पा रहे या कोई गंभीर बीमार है, तो उसकी मदद करें। यदि आप समर्थ हैं, तो उनकी शिक्षा और इलाज पर खर्च करें। जो दुख में काम न आए, वह रिश्तेदार कहलाने के योग्य नहीं।
भक्ति का पहला सूत्र: 'चुंबक' जैसा हो शिव भक्त का साथ
कथा में पर्वत मुनि और देवर्षि नारद के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि जब पर्वत मुनि को 3000 वर्ष तक शिव के दर्शन नहीं हुए, तब तुमरुक जी ने उन्हें पहला सूत्र दिया—'शिव भक्त के साथ रहकर शिव भक्ति करना'।
चुंबक का सिद्धांत: जैसे चुंबक लोहे को अपने साथ चिपकाए रखती है और अंततः उस लोहे में भी आकर्षण की शक्ति पैदा कर देती है, वैसे ही एक सच्चा शिव भक्त अपने साथ रहने वाले दूसरे व्यक्ति को भी महादेव की भक्ति के रंग में रंग देता है।
कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का कड़ा संदेश: 'मुझसे मत मिलो, महादेव की आराधना करो'
भीलवाड़ा | संकट मोचन हनुमान मंदिर के सानिध्य में चल रही शिव महापुराण कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपनी दिनचर्या और भक्तों के प्रति एक स्पष्ट संदेश साझा किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि भक्त अपनी समस्याओं के समाधान के लिए किसी व्यक्ति विशेष के पीछे भागने के बजाय सीधे महादेव की शरण में जाएं।
चार दिन का एकांत और आराधना का नियम
पंडित मिश्रा ने अपनी व्यवस्था स्पष्ट करते हुए बताया कि कथा के दौरान वे पूर्णतः एकांत और शिव भक्ति में लीन रहते हैं। उन्होंने कहा:
सीमित मुलाकात: "हम कथा के शुरुआती चार दिनों तक किसी से नहीं मिलते हैं। कमरे से निकलकर सीधे व्यासपीठ और वहां से वापस एकांत में चले जाते हैं।"
नियत समय: चार दिन पूर्ण होने के बाद, पांचवें दिन शाम 7:00 बजे केवल आधे घंटे के लिए लोगों से मिलने का समय निर्धारित है। इसके अलावा कोई भी आए, मिलना संभव नहीं होता।
भक्ति का मार्ग: उन्होंने भक्तों से आग्रह किया कि वे पुलिस या सेवादारों से उलझने या उनसे मिलने की जिद्द करने के बजाय अपना समय शिव की आराधना में लगाएं।
ज्योतिषियों के चक्कर छोड़ें: शिव का द्वार या डॉक्टर का परामर्श
पंडित मिश्रा ने अंधविश्वास और भ्रम फैलाने वालों पर प्रहार करते हुए भक्तों को सही मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा:
"किसी पंडित या ज्योतिषी के चक्कर में पड़कर अपना समय और धन बर्बाद न करें। यदि जीवन में कोई बड़ी तकलीफ है, तो सीधा रास्ता यह है कि या तो शिव के दरबार में जाकर एक लोटा जल अर्पित करें और उनसे प्रार्थना करें, या फिर उचित डॉक्टर को दिखाकर अपना इलाज करवाएं।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि महादेव ही समस्त दुखों के हर्ता हैं और विज्ञान (चिकित्सा) भी उन्हीं की कृपा का एक रूप है। इसलिए किसी मध्यस्थ के बजाय स्वयं को ईश्वर से जोड़ें।
सावधान! खुद भगवान बनने की कोशिश न करें
पंडित मिश्रा ने आज के दौर में बढ़ते अहंकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, "थोड़ा सा भजन या तप करने के बाद जब लोग आपको भगवान की तरह पूजने लगें, तो समझ लेना कि महादेव आपसे दूर हो गए हैं।" उन्होंने भक्तों को चेतावनी देते हुए कहा कि हमेशा भक्त बने रहने में ही भलाई है।
"जब तक आप भक्त हैं, तब तक आप मंदिर जाएंगे, जल चढ़ाएंगे और मंत्र जाप करेंगे। लेकिन जिस दिन आप खुद को भगवान मान लेंगे और लोग आपका दर्शन करने आने लगेंगे, उस दिन ईश्वर आपसे बहुत दूर चला जाएगा। इसलिए स्वयं को भगवान मत बनाओ, बस महादेव के चरणों के दास बने रहो।
सब्जी मंडी और कपड़े की दुकान से बाहर निकलकर एक ईश्वर को पहचानें: पंडित प्रदीप मिश्रा
भीलवाड़ा | संकट मोचन हनुमान मंदिर के तत्वावधान में आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने भक्तों की चंचल बुद्धि और भक्ति के 'भेद' पर कटाक्ष करते हुए एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इंसान की बुद्धि आज भी संसार की उलझनों में ही फंसी हुई है।
भक्ति में मोल-भाव बंद करें
पंडित मिश्रा ने बड़े ही सरल अंदाज में समझाया कि जैसे आप सब्जी मंडी में खड़े होकर सोचते हैं कि 'भिंडी लूं या गिलकी, लौकी लूं या कद्दू', या कपड़े की दुकान पर साड़ियों का चयन करते हैं, वैसी ही स्थिति आपने धर्म के साथ कर दी है। आपकी बुद्धि आज भी इसी ऊहापोह में है कि 'राम का भजन करूं या कृष्ण का, शिव को पूजूं या हनुमान को'। उन्होंने कहा कि जब तक आप ईश्वर को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर देखेंगे, तब तक आप संसार की 'मंडी' से बाहर नहीं निकल पाएंगे।
त्रिदेवों की एकता का प्रतीक: जलाधारी का मटका
शिव महापुराण की गूढ़ व्याख्या करते हुए उन्होंने शिवलिंग के ऊपर बंधी जलाधारी (मटके) का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया:
तीन पांव की शक्ति: शिवलिंग के ऊपर जो तीन पैरों वाला स्टैंड होता है, जिस पर जल का पात्र रखा जाता है, वे तीन पैर साक्षात् ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक हैं।
एक बूंद जल का संदेश: उस पात्र से जो एक-एक बूंद जल नीचे शिवलिंग पर गिरता है, वह यह दर्शाता है कि जड़ (स्रोत) भले ही तीन दिखें, लेकिन तत्व एक ही है।
जिस दिन 'एक' दिखेगा, उस दिन मन श्रेष्ठ होगा
पंडित मिश्रा ने कहा, "जिस दिन तुम्हारे मन में यह भेद मिट जाएगा और तुम्हें सब एक दिखने लगेंगे, समझ लेना कि तुम्हारा मन श्रेष्ठ हो गया है।" उन्होंने भक्तों को नसीहत दी कि जैसे आप अपने बच्चे को दृढ़ता से कहते हैं कि 'जा बेटा, टमाटर ही लेकर आना', वैसे ही अपने मन को भी दृढ़ करें। भक्ति में 'विकल्प' ढूंढना छोड़कर उस एक परमात्मा की शरण में जाएं जो कण-कण में व्याप्त है।
मौन और प्रेम की पराकाष्ठा: नंदी की तरह अपलक शिव को निहारना ही असली भक्ति - पंडित प्रदीप मिश्रा
भीलवाड़ा | संकट मोचन हनुमान मंदिर में चल रही शिव महापुराण कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने भक्ति के एक ऐसे सूत्र की व्याख्या की, जो शब्दों से परे है। उन्होंने कहा कि महादेव को पाने के लिए बहुत बोलने या मंत्रों के शोर की आवश्यकता नहीं है, बल्कि 'मौन' होकर उन्हें निहारना ही पर्याप्त है।
नंदी जैसा धैर्य और मौन धारण करें
पंडित मिश्रा ने मंदिर में विराजमान नंदी का उदाहरण देते हुए कहा कि नंदी कभी कुछ बोलते नहीं, वे केवल अपनी एकटक दृष्टि महादेव पर टिकाए रखते हैं। उन्होंने भक्तों से आह्वान किया, "शिव के मंदिर में जाकर नंदी के पास बैठो और उन्हीं की तरह चुप होकर शिव को देखना प्रारंभ कर दो। जिस दिन आप मौन होकर उन्हें निहारने लगेंगे, समझ लेना कि शंकर आपको मिल गए।"
प्रेम में शब्दों की जगह नहीं, केवल दर्शन ही काफी
भक्ति और प्रेम के अंतर को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा:
व्यवहार बनाम प्रेम: दुनिया में रिश्तों को निभाने के लिए बोलना पड़ता है, व्यवहार करना पड़ता है। लेकिन ईश्वर से 'प्रेम' करने के लिए बोलना जरूरी नहीं है।
मूक अनुराग: सच्चा प्रेम वह है जिसमें वाणी मौन हो जाए और केवल आंखें अपने आराध्य को निहारती रहें।
जीवन की सार्थकता: उन्होंने कहा, "अगर आपके मन में महादेव के प्रति निष्कपट प्रेम है, तो केवल उन्हें देखने मात्र से ही आपका जीवन सार्थक हो जाएगा। कुछ मांगने या कहने की आवश्यकता शेष नहीं रहेगी।"
पंडित मिश्रा ने भीलवाड़ा के श्रद्धालुओं को भावविभोर करते हुए कहा कि शिव को पाने का सबसे छोटा रास्ता 'मौन दर्शन' है। जैसे ही आपकी दृष्टि और शिव की कृपा एक होती है, सारे संकट स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।
रुद्राक्ष की मर्यादा: शिव भक्त को अपशब्द कहने से पहले सौ बार सोचें, भुगतना पड़ेगा परिणाम - पंडित प्रदीप मिश्रा
भीलवाड़ा | संकट मोचन हनुमान मंदिर के सानिध्य में आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने रुद्राक्ष की महिमा और शिव भक्त के सम्मान पर भक्तों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति गले में रुद्राक्ष धारण करता है, वह साक्षात् शिव का अंश स्वरूप हो जाता है और उसका अपमान करना स्वयं महादेव को क्रोधित करने जैसा है।
रुद्राक्ष पहनने वाले को गाली देना यानी स्वयं को संकट में डालना
पंडित मिश्रा ने बड़े ही गंभीर स्वर में भीलवाड़ा के श्रद्धालुओं को सावधान करते हुए कहा, "किसी को भी अपशब्द कहने या अपमानित करने से पहले यह देख लेना कि उसके गले में रुद्राक्ष तो नहीं पड़ा है। यदि किसी रुद्राक्षधारी को तुमने गाली दी है या उसे अपशब्द कहे हैं, तो यह बात गांठ बांध लेना कि तुम्हें मरने से पहले इसी जन्म में उसका भारी हर्जाना भुगतना पड़ेगा।"
कर्मों का हिसाब यहीं होगा
कथा में उन्होंने स्पष्ट किया कि रुद्राक्ष केवल एक मनका नहीं, बल्कि शिव के आंसुओं से जन्मी दिव्य शक्ति है। उन्होंने कहा:
भक्ति का कवच: रुद्राक्ष धारण करने वाला व्यक्ति शिव की शरण में होता है।
अपमान का फल: जो लोग बिना सोचे-समझे किसी शिव भक्त या रुद्राक्षधारी का तिरस्कार करते हैं, उनके लिए प्रारब्ध में कष्ट निश्चित हो जाते हैं।
चेतावनी: उन्होंने जोर देकर कहा, "तैयार रहना, क्योंकि प्रकृति और महादेव ऐसे अपमान का हिसाब बहुत जल्द और कड़ाई से करते हैं।"
पंडित मिश्रा ने भक्तों को सीख दी कि रुद्राक्ष पहनने वाले का सम्मान करें और स्वयं भी शिव के इस मंगलमय आभूषण को धारण कर अपने आचरण को पवित्र बनाएं।
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