लम्पिया खनन बना सियासी दबाव का अखाड़ा, मजदूरों की रोजी पर मंडराया संकट

X

भीलवाड़ा। जिले के लम्पिया खनन क्षेत्र में चल रहा वैधानिक खनन व ब्लास्टिंग कार्य एक बार फिर विवादों में घिर गया है। ग्राम जालिया के नागरिकों, श्रमिकों और उपठेकेदारों ने कुछ स्थानीय लोगों पर सुनियोजित तरीके से खनन कार्य को अवैध रूप से रुकवाने, बार-बार भ्रामक ज्ञापन देने और मुआवजा लेने के बाद भी पुनः अवैध मांग करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि खनन कंपनी द्वारा प्रभावित व्यक्तियों को नियमानुसार संपूर्ण मुआवजा नकद रूप में पहले ही दिया जा चुका है। इसके बावजूद कुछ लोग दबाव बनाकर ब्लास्टिंग कार्य बंद कराने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे ग्रामीण जबरन वसूली और आपराधिक धमकी की श्रेणी में मान रहे हैं। उनका आरोप है कि बार-बार झूठे आरोप लगाकर प्रशासन को गुमराह किया जा रहा है ताकि निजी स्वार्थ साधा जा सके।

स्थानीय लोगों के अनुसार कंपनी ने सभी वैधानिक अनुमतियां, पर्यावरणीय शर्तें, सुरक्षा मानक और स्थानीय रोजगार से जुड़े दायित्वों का पालन किया है। इसके बावजूद विरोध के नाम पर काम रुकवाना न केवल कानून व्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि सैकड़ों मजदूर परिवारों की आजीविका पर भी सीधा असर डाल रहा है।

प्रकरण में उपखंड अधिकारी द्वारा कई बार समझाइश कर मामला शांत कराने का प्रयास किया गया, लेकिन सहमति न बनने पर कुछ लोगों द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों पर भी निराधार आरोप लगाए गए। ग्रामीणों का मानना है कि यह प्रशासनिक गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला गंभीर कृत्य है।

खनन कार्य बाधित होने से गांव में तनाव का माहौल बन गया है। मजदूरों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति बिगड़ सकती है। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मुआवजा प्राप्त करने के बावजूद अवैध मांग करने वालों, झूठे ज्ञापन देने वालों और काम रुकवाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों ने यह भी मांग रखी है कि लम्पिया खनन स्थल पर वैधानिक खनन और ब्लास्टिंग कार्य को बिना किसी बाधा के पुनः शुरू कराया जाए, ताकि गांव में रोजगार, शांति और विकास का रास्ता फिर से खुल सके। उनका कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति या प्रशासन के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने हक, रोजगार और गांव की स्थिरता की रक्षा के लिए है।

Tags

Next Story