भीलवाड़ा बनेगा सनातन संस्कृति का महासंगम, 19 से 26 फरवरी तक सनातन मंगल महोत्सव

भीलवाड़ा बनेगा सनातन संस्कृति का महासंगम, 19 से 26 फरवरी तक सनातन मंगल महोत्सव
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भीलवाड़ा। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा अब केवल व्यापार और उद्योग की पहचान नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के विराट केंद्र के रूप में इतिहास रचने जा रही है। जिला मुख्यालय स्थित हरि सेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में 19 से 26 फरवरी तक आयोजित होने वाला आठ दिवसीय ‘सनातन मंगल महोत्सव एवं दीक्षा-दान समारोह’ श्रद्धा, भक्ति और संस्कृति का ऐसा महासंगम बनेगा, जिसकी मिसाल देशभर में विरले ही देखने को मिलेगी।

इस ऐतिहासिक महोत्सव में आश्रम के तीन ब्रह्मचारी इन्द्रदेव, सिद्धार्थ एवं कुनाल को विधिवत दीक्षा प्रदान की जाएगी। यह तीनों संत बाल्यकाल से ही आश्रम की सेवा, साधना और अनुशासन में रमे हुए हैं। दीक्षा-दान के साथ ही वे सनातन परंपरा की अखंड ज्योति को समाज में प्रज्वलित करने के संकल्प के साथ संत जीवन में प्रवेश करेंगे।

हरी सेवा उदासीन आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज ने इसे “देश में पहली बार इस स्तर का सनातन महासमागम” बताया है। उनके अनुसार “सनातन में न जाति है, न पंथ, केवल सनातन है। हमारा लक्ष्य सभी सनातनियों को एक जाजम पर लाना है जहां पंगत, संगत, भाषा और वेशभूषा एक हो।”

इसी भावना के साथ इस महोत्सव में देशभर के जगद्गुरु, महामंडलेश्वर, पीठाधीश्वर और प्रमुख संत-महात्मा पधारेंगे। आश्रम से जुड़े विदेशों में रहने वाले भक्त भी विशेष रूप से भीलवाड़ा पहुंचेंगे और यज्ञ व सेवा कार्यों में सहभागिता करेंगे।

सनातन मंगल महोत्सव के लिए देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों को भी निमंत्रण भेजा गया है। समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राजस्थान के राज्यपाल हरिभाउ बागड़े, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राज विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति की संभावना जताई जा रही है। इससे आयोजन को राष्ट्रीय स्तर की पहचान मिलने जा रही है और भीलवाड़ा धर्मनगरी के रूप में मानचित्र पर और अधिक उभरेगा।

महोत्सव में उदासीन कार्ष्णि पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी गुरुशरणानंद महाराज (मथुरा), बाबा कल्याणदास महाराज (अमरकंटक), महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज, मलूकपीठाधीश्वर स्वामी राजेन्द्रदास देवाचार्य महाराज सहित सैकड़ों संत-महात्मा पधारेंगे।

महामंडलेश्वर हंसाराम ने बताया कि सभी सनातनियों को एक जाजम पर लाना है. इसमें पंगत, संगत, भाषा व वेशभूषा एक होनी चाहिए. इसमें देश के कई महापुरुष व वृंदावन के संत मौजूद रहेंगे। इन्हीं के साथ देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और कई प्रदेशों के मुख्यमंत्री को निमंत्रण दिया है. इस सनातन समागम में विदेश से भी भक्त आ रहे हैं, जो समाज व संस्कृति को सजाने के लिए यज्ञ में आहुति देंगे।

एक वेश, एक भाव ड्रेस कोड की अनूठी पहल--

महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम महाराज ने बताया कि यज्ञ में बैठने वाले यजमान से केवल एक श्रीफल और एक रुपया दक्षिणा स्वरूप लिया जाएगा। साथ ही सभी के लिए एक समान वेशभूषा की व्यवस्था आश्रम की ओर से की जाएगी। यह पहल सामाजिक समरसता और समानता का सशक्त संदेश देती है जहां न कोई ऊंच-नीच, न कोई भेदभाव, केवल सनातन एकता का भाव।

आठ दिन, आठ अध्याय भक्ति का महायज्ञ--

महोत्सव का शुभारंभ 19 फरवरी को प्रातः श्रीमद् भागवत कलश यात्रा से होगा, जो संकटमोचन हनुमान मंदिर (पोस्ट ऑफिस के सामने) से प्रारंभ होकर हरि सेवा उदासीन आश्रम पहुंचेगी।

19 से 25 फरवरी तक वृन्दावन के कथा व्यास डॉ. श्यामसुन्दर पाराशर द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कराया जाएगा।

प्रतिदिन के कार्यक्रमों में पंचकुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ, अष्टोत्तर शत भागवत मूल पाठ, अखंड श्रीमद् भगवद्गीता पाठ, रामचरितमानस पाठ, रामनाम संकीर्तन, काशी परंपरा अनुसार गंगा आरती, वृन्दावन की रासलीला मंडली द्वारा रासलीला मंचन जैसे आध्यात्मिक आयोजन होंगे। इससे पूरा भीलवाड़ा मानो भक्ति और वैराग्य की गंगा में डूब जाएगा।

25 को शोभायात्रा, 26 को दीक्षा-दान का महापर्व--

25 फरवरी को संत-दर्शन एवं सनातन शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो शहर को धर्ममय वातावरण से सराबोर कर देगी। 26 फरवरी को विशाल पांडाल में मुख्य दीक्षा-दान समारोह आयोजित होगा, जिसमें ब्रह्मचारी इन्द्रदेव, सिद्धार्थ और कुनाल को विधिवत दीक्षा प्रदान की जाएगी। यही दिन महोत्सव का आध्यात्मिक शिखर होगा।

भीलवाड़ा बनेगा श्रद्धा, संस्कृति और सेवा का प्रतीक--

महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज के अनुसार “यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का अभियान है। यहां हर कदम पर भक्ति बोलेगी और हर दृश्य इतिहास रचेगा।” यह सनातन मंगल महोत्सव भीलवाड़ा को केवल वस्त्र नगरी नहीं, बल्कि धर्म और संस्कृति की राजधानी के रूप में भी पहचान दिलाने जा रहा है।

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