सहकारी कर्मचारियों का फूटा गुस्सा: मांडल में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

मांडल (सोनिया सागर)। राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, जयपुर के आह्वान पर सोमवार को मांडल शाखा के सहकारी कार्मिकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने उपखंड अधिकारी संजना जोशी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्याप्त समस्याओं के शीघ्र निराकरण की गुहार लगाई। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि लंबे समय से मांगों पर ध्यान न दिए जाने के कारण प्रदेशभर के कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
प्रमुख मांगें और लंबित मुद्दे
कर्मचारियों ने अपनी मांगों को विभिन्न चरणों में वर्गीकृत करते हुए प्रशासन के समक्ष रखा:
कैडर अथॉरिटी का निर्धारण: कार्मिकों ने मांग की है कि ग्राम सेवा सहकारी समितियों के लिए स्पष्ट कैडर अथॉरिटी और नियोक्ता का निर्धारण किया जाए। सहकारिता विभाग द्वारा गठित समिति के सुझावों पर पिछले तीन माह से फाइलें दबी हुई हैं, जिन्हें तुरंत क्रियान्वित करने की मांग की गई।
ऋण पर्यवेक्षकों की नियुक्ति: जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में ऋण पर्यवेक्षकों के रिक्त पदों पर शत-प्रतिशत नियुक्तियां समिति व्यवस्थापकों में से करने और भर्ती प्रक्रिया में आयु सीमा की बाध्यता को पूरी तरह समाप्त करने पर जोर दिया गया।
नियमितीकरण की प्रक्रिया: 10 जुलाई 2017 से पूर्व नियुक्त कर्मचारियों के नियमितीकरण की रुकी हुई प्रक्रिया को पुनः शुरू करने की मांग की गई। इसमें व्यवस्थापक, सहायक व्यवस्थापक, सेल्समैन, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटरों को शामिल करने की बात कही गई है।
20 प्रतिशत कोटा भर्ती: बैंकिंग सहायक पदों पर व्यवस्थापकों के लिए आरक्षित 20 प्रतिशत कोटे की रुकी हुई चयन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से शुरू करने की मांग रखी गई।
दो दिवसीय धरना और आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन देने से पूर्व सहकारी समितियों के कार्मिकों ने मांडल सहकारी क्रय-विक्रय समिति बैंक परिसर में दो दिवसीय धरना दिया। धरने के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में सहकारी कर्मचारी और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
