गौ चिकित्सा को बढ़ावा देने की मांग के साथ विधायक कोठारी ने दो विधेयकों का किया समर्थन

गौ चिकित्सा को बढ़ावा देने की मांग के साथ विधायक कोठारी ने दो विधेयकों का किया समर्थन
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भीलवाड़ा, । भीलवाड़ा विधायक अशोक कुमार कोठारी ने आज राजस्थान विधानसभा में महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखते हुए आयुष चिकित्सा, ग्रामीण लोकतंत्र और गौ संरक्षण से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

विधायक कोठारी ने सदन में प्रस्तुत दो महत्वपूर्ण विधेयकों का समर्थन किया तथा स्थगन प्रस्ताव पर गौशालाओं और गौ चिकित्सा से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

विधानसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान विधायक कोठारी ने “राजस्थान आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय, अजमेर विधेयक, 2026” का समर्थन करते हुए कहा कि यह विधेयक केवल एक विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं बल्कि भारत की हजारों वर्ष पुरानी आयुर्वेद और योग परंपरा को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा की ओर आकर्षित हो रही है और कोरोना महामारी के बाद लोगों ने प्रतिरक्षा शक्ति तथा प्राकृतिक चिकित्सा के महत्व को बेहतर ढंग से समझा है।

विधायक कोठारी ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय परिसर जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा और भीलवाड़ा में स्थापित किए जाएं, ताकि प्रदेश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों को आयुष शिक्षा का लाभ मिल सके। साथ ही उन्होंने आयुष और आधुनिक चिकित्सा के संयुक्त अनुसंधान केंद्र स्थापित करने का भी सुझाव दिया, जिससे आयुर्वेद की वैज्ञानिक विश्वसनीयता और अधिक मजबूत हो सके।

उन्होंने विश्वविद्यालय में ऑनलाइन पाठ्यक्रम, डिजिटल लाइब्रेरी और वर्चुअल क्लास की व्यवस्था करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों के विद्यार्थी भी आयुष शिक्षा से जुड़ सकें। इसके साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में आयुष नवाचार एवं स्टार्टअप केंद्र तथा बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर मिलेंगे।

विधायक कोठारी ने विशेष रूप से विधेयक में गौ आधारित चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आयुर्वेद और भारतीय परंपरा में गौमाता का विशेष महत्व रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में गौ आधारित चिकित्सा पद्धति पर विशेष शोध और अध्ययन की व्यवस्था की जानी चाहिए। वर्तमान में गौ चिकित्सा से कैंसर सहित अन्य असाध्य रोगों पर रिसर्च किया जा रहा है जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे है ।उन्होंने उल्लेख किया कि गौमूत्र, पंचगव्य और अन्य गौ उत्पादों पर देश के कई राज्यों, विशेष रूप से गुजरात में, महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्य हो रहे हैं। यदि इस दिशा में संगठित शोध किया जाए तो आयुर्वेद चिकित्सा को नई दिशा मिल सकती है।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय द्वारा आसपास के गांवों को गोद लेकर “आयुष ग्राम” परियोजना चलाई जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो सके। साथ ही अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए इंटीग्रेटेड आयुष हॉस्पिटल, मेडिकल टूरिज्म और कौशल आधारित पाठ्यक्रम जैसे पंचकर्म, योग प्रशिक्षक और आयुर्वेदिक फार्मेसी के अल्पकालिक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम प्रारंभ करने का भी सुझाव दिया।

इसी प्रकार विधायक कोठारी ने “राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026” का समर्थन करते हुए कहा कि पंचायतें भारतीय लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि गांव की चौपाल से ही लोकतंत्र की शुरुआत होती है और पंचायतें मजबूत होंगी तो गांव और प्रदेश दोनों मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि दो से अधिक बच्चों की शर्त के कारण कई योग्य और समर्पित लोगों को पंचायत चुनाव लड़ने से वंचित होना पड़ता था। यह संशोधन लोकतंत्र की भावना के अनुरूप है और इससे अधिक लोगों को जनसेवा का अवसर मिलेगा।

इसके अतिरिक्त विधायक कोठारी ने स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान प्रदेश की गौशालाओं की स्थिति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति और कृषि व्यवस्था की आधारशिला रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हजारों गौशालाएं निराश्रित गौवंश की सेवा कर रही हैं, लेकिन अनुदान समय पर नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि गौशालाओं को मिलने वाला अनुदान 9 माह से बढ़ाकर 12 माह किया जाए तथा अनुदान समय पर जारी किया जाए, ताकि गौशालाओं को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही उन्होंने गौशाला खोलने के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया को सरल बनाने तथा ग्राम पंचायत स्तर पर गौ आश्रय स्थल और तहसील स्तर पर नंदी शालाओं की स्थापना की वर्तमान नियमावली का सरलीकरणकरने का भी सुझाव दिया।

विधायक कोठारी ने कहा कि यदि सरकार इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करती है तो इससे प्रदेश में आयुष चिकित्सा, गौ आधारित चिकित्सा और गौ संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी तथा राजस्थान इस क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकेगा।

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