मुनि प्रणीत सागर महाराज का 42वां अवतरण दिवस हर्षोल्लास के साथ संपन्न

मुनि प्रणीत सागर महाराज का 42वां अवतरण दिवस हर्षोल्लास के साथ संपन्न
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आकोला (रमेश चंद्र डाड)। महुआ स्थित स्थानीय दिगम्बर जैन मंदिर में चर्या शिरोमणि आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य 108 मुनि प्रणीत सागर महाराज का 42वां अवतरण दिवस अत्यधिक धूमधाम और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर समूचा जैन समाज भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ, जिसके पश्चात समाज के सभी श्रेष्ठियों ने मुनि श्री के चरणों का प्रक्षालन (पद प्रक्षालन) कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके उपरांत मुनि श्री के करकमलों में शास्त्र दान की क्रिया संपन्न की गई। उत्सव के दौरान युवा मंडल, बालक मंडल एवं महिला मंडल के सदस्यों ने नाचते, गाते और झूमते हुए अष्ट द्रव्य से मुनि श्री का पूजन किया।

सांसारिक सुखों को त्याग धारण किया संयम

अपने उद्बोधन में पूज्य मुनि श्री ने वैराग्य धारण करने की घटना को साझा किया। उन्होंने बताया कि गृहस्थ जीवन में वे एक उच्च पद पर आसीन थे और घर में सभी आधुनिक सुख-सुविधाएं उपलब्ध थीं, किंतु वे उनसे संतुष्ट नहीं थे। निराकुल और सच्चे सुख की खोज उन्हें संयम के मार्ग पर ले आई। आज मुनि श्री स्वयं के साथ-साथ हजारों भव्य जीवों को धर्म के मार्ग पर प्रशस्त कर रहे हैं।

नगर में बह रही धर्म की गंगा

मुनि श्री के महुआ प्रवास से क्षेत्र में धर्म का विशेष उत्साह देखा जा रहा है। बच्चे, बूढ़े और युवा सभी धर्म लाभ ले रहे हैं। इस मांगलिक अवसर पर पंडित बृजेश शास्त्री, मुकेश सेठिया, सुरेश सोनी, राजेश काला, महावीर ठग, सतीश सेठिया, पंकज सेठिया, छवि, चैनसुख काला, लोकेश सेठिया सहित जैन समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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