भीलवाड़ा के नागा परिवार ने पेश की मिसाल: मायरे में कपड़ों के बजाय ’रोकड़ उपहार’ देकर फिजूलखर्ची पर लगाया अंकुश

भीलवाड़ा - समाज में व्याप्त कुरीतियों और दिखावे की परंपरा को तोड़ते हुए हरणी कलाँ के नागा परिवार ने एक बार फिर सामाजिक सुधार की अनूठी मिसाल पेश की है। राजस्थान मेवाड़ जाट महासभा, भीलवाड़ा के अध्यक्ष भवानी राम नागा और भैरूलाल नागा ने सुवाणा स्थित लामरोड परिवार में आयोजित मायरे (भात) के उत्सव में कपड़ों के अनावश्यक लेन-देन को त्यागकर नकद राशि (रोकड़ लिफाफा) भेंट कर समाज को एक नई दिशा दी है।
उल्लेखनीय है कि नागा परिवार द्वारा यह लगातार तीसरा मायरा है, जिसमें कपड़ों की बर्बादी रोकने के लिए यह अनूठी पहल की गई है। अक्सर देखा जाता है कि मायरे में बड़ी संख्या में कपड़ों का लेन-देन होता है, जिनमें से कई कपड़े अनुपयोगी रह जाते हैं और धन की बर्बादी होती है। इस बर्बादी को रोकने के लिए नागा परिवार ने अपने रिश्तेदारों को केवल नकद उपहार देकर सादगी का संदेश दिया।
नागा परिवार की इस पहल का जाट समाज के बुजुर्गों, महिलाओं और विशेषकर युवाओं ने खुले दिल से स्वागत किया है। समाज के प्रबुद्ध जनों का मानना है कि - ’’यह पहल मध्यमवर्गीय परिवारों को आर्थिक दबाव से बचाएगी।’’ उपहार स्वरूप दी गई नकद राशि का उपयोग संबंधित परिवार अपनी जरूरत के अनुसार बेहतर ढंग से कर सकता है। इससे समाज में दिखावे की होड़ कम होगी। साथ ही राजस्थान मेवाड़ जाट महासभा भीलवाड़ा ने सम्पूर्ण जाट समाज द्वारा आयोजित 05.02.2026 की मीटिंग के अनुसार अपील करते हुए कहा कि 1 मार्च 2026 से जाट समाज द्वारा शादी में अधिकतम 5 लाख के सोने चांदी जेवरात ले जाने की जो लिमिट तय की है, उसकी पालना सुनिश्चित करावें।
इस अवसर पर जाट समाज के प्रतिनिधियों ने अन्य परिवारों से भी आह्वान किया है कि वे इस पहल को धरातल पर लागू करें ताकि सामाजिक आयोजनों को सरल और सार्थक बनाया जा सके। नागा परिवार के इस कदम को भीलवाड़ा क्षेत्र में एक बड़े सामाजिक बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
