गोवा में अखिल भारतीय सिंधु संत समाज ट्रस्ट की राष्ट्रीय बैठक संपन्न, लव जिहाद और धर्मांतरण पर हुआ गहन चिंतन

भीलवाड़ा/गोवा। अखिल भारतीय सिंधु संत समाज ट्रस्ट की राष्ट्रीय और प्रदेश कार्यकारिणी की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक 07 और 08 मार्च 2026 को गोवा में संपन्न हुई। श्री अमरधाम उदासीन आश्रम, उल्हासनगर के श्री महंत स्वामी अर्जनदास जी के आतिथ्य में आयोजित इस बैठक में देश भर के प्रमुख संतों ने शिरकत की।
सनातन और सिंधु संस्कृति के प्रचार पर जोर
बैठक के प्रथम सत्र की शुरुआत मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन और भगवान श्री श्रीचंद्र पूजन के साथ हुई। महामंत्री स्वामी हंसदास जी (रीवा) ने बताया कि सिंधी टिकाणों (प्राचीन गद्दियों) में सनातन धर्म और सिंधु संस्कृति के रीति-रिवाजों के प्रचार-प्रसार पर विस्तृत चर्चा की गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी खिमयादास जी ने आह्वान किया कि सभी संत अपने केंद्रों पर नवसंवत्सर (हिंदू नववर्ष), रामनवमी, हनुमान जयंती के साथ-साथ सिंधु संस्कृति के विशेष पर्व जैसे थधड़ी, गोग्यो, टीजड़ी और महालक्ष्मी पूजा का भव्य आयोजन करें। बच्चों को जागरूक करने हेतु 'संध्या गुरुकुलम' प्रारंभ करने का भी सुझाव दिया गया।
'राम नाम लेखन' अभियान की शुरुआत
महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी (भीलवाड़ा) के प्रस्ताव पर सदन ने सर्वसम्मति से देशभर के सिंधी मंदिरों में 'राम नाम लेखन पुस्तिका' बांटने का निर्णय लिया। इस अभियान की देखरेख के लिए महंत स्वामी स्वरूपदास (अजमेर), महंत स्वामी हनुमानराम (पुष्कर) और स्वामी हंसदास (रीवा) की तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है।
धर्मांतरण और लव जिहाद के खिलाफ एकजुटता
बैठक के दूसरे सत्र में धर्मांतरण और लव जिहाद जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई। संतों ने माना कि युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास का सटीक ज्ञान न होना ही इन समस्याओं की मुख्य जड़ है। महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी ने कहा, "धर्म की रक्षा के लिए संतों को आगे आना होगा और समाज में फैल रही कुरीतियों का मुंहतोड़ जवाब देना होगा।" निर्णय लिया गया कि ऐसे मामलों में समाज एकजुट होकर प्रशासन के सहयोग से कार्य करेगा।
अयोध्या धाम में होगा बड़ा सम्मेलन
आगामी छह माह की कार्ययोजना के तहत अयोध्या धाम में नवनिर्मित श्री राम लला के दर्शन और तीन दिवसीय विशाल संत सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया। बैठक के अंत में दिवंगत महापुरुषों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान संरक्षक महंत श्यामदास जी (किशनगढ़), कोषाध्यक्ष महंत स्वरूपदास जी (अजमेर), महंत अर्जनदास जी (उल्हासनगर) सहित जयपुर, भोपाल, इंदौर और कोटा के कई संत उपस्थित रहे।
