सवाईपुर क्षेत्र में कुदरत का कहर: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान

सवाईपुर (सांवर वैष्णव)। सवाईपुर कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सोमवार रात्रि को प्रकृति ने अपना रौद्र रूप दिखाया। बेमौसम हुई मूसलाधार बारिश और भारी ओलावृष्टि ने क्षेत्र के किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। पककर तैयार खड़ी गेहूं, जौं और चना की फसलों को इस आपदा से जबरदस्त नुकसान पहुंचा है।

सोमवार शाम को अचानक मौसम का मिजाज बदला और तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर शुरू हो गया। देखते ही देखते क्षेत्र के होलिरड़ा, खरेड़, भाकलिया, गेंदलिया, बड़ला, चावंडिया, रूपाहेली, आकोला और चांदगढ़ आदि गांवों में कहीं छोटे बेर तो कहीं नींबू के आकार के ओले गिरे। ओलावृष्टि इतनी अधिक थी कि कई जगह खेतों में सफेद चादर बिछ गई।

4 महीने की मेहनत पर फिरा पानी

किसानों ने बताया कि खेतों में फसलें पूरी तरह पक चुकी थीं। कुछ स्थानों पर फसलें कटकर खेतों में ही पड़ी थीं, जो इस बारिश और ओलों से पूरी तरह खराब हो गई हैं। यदि 10-15 दिन मौसम साफ रहता तो फसल सुरक्षित घर आ जाती, लेकिन अब दाने की क्वालिटी बिगड़ने और फसल आड़ी गिरने से भारी आर्थिक नुकसान तय है। मंगलवार सुबह किसानों ने खेतों में पहुंचकर अपनी बर्बाद फसलों की सार-संभाल की।

नेताओं और किसानों की मांग: 'मिले उचित मुआवजा'

कन्हैयालाल प्रजापत (तहसील अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ): क्षेत्र के कई गांवों में ओलावृष्टि से गेहूं, चना और जौं की फसल तबाह हो गई है। हम सरकार से जल्द गिरदावरी करवाकर मुआवजे की मांग करेंगे।

राजू वैष्णव (किसान, खरेड़): सोमवार रात गिरे नींबू के आकार के ओलों ने फसलों की क्वालिटी बिगाड़ दी है। अब बाजार में सही दाम नहीं मिलेंगे। सरकार को तुरंत राहत देनी चाहिए।

बद्रीलाल जाट (प्रदेश अफीम आयाम प्रमुख, भारतीय किसान संघ): कोटड़ी तहसील के सवाईपुर और बड़लियास क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है। कटकर पड़ी फसलें भी खराब हो गई हैं। किसानों को तो पिछला मुआवजा भी अभी तक नहीं मिला है, सरकार को इस ओर ध्यान देना होगा।

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