शताब्दी वर्ष पर काशीपुरी में सजा 'विराट हिंदू सम्मेलन' का मंच, संत दिग्विजयराम बोले हम बटेंगे तो कटेंगे

भीलवाड़ा । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के पावन उपलक्ष्य में आज वस्त्र नगरी भीलवाड़ा की धरा एक ऐतिहासिक साक्षी बनी। काशीपुरी के पावन सानिध्य में आयोजित 'विराट हिंदू सम्मेलन' ने न केवल हिंदू समाज की शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि सनातन संस्कृति की रक्षा और सामाजिक समरसता का एक नया अध्याय भी लिखा। कार्यक्रम का मंगलारंभ सुबह 9:30 बजे काशीपुरी स्थित राधा कृष्ण मंदिर से हुआ। जब भव्य शोभायात्रा सड़कों पर उतरी, तो पूरा भीलवाड़ा भगवामय हो गया। ढोल-नगाड़ों की थाप और गगनभेदी जयघोष के साथ निकली इस यात्रा ने हिंदू समाज की अटूट आस्था और अनुशासन का परिचय दिया। शहर के मुख्य मार्गों से गुजरती इस शोभायात्रा का पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया गया, जो हिंदू शक्ति के बढ़ते कदमों का प्रतीक बनी। शोभायात्रा में 11 ढोल, 2 बैंड, 2 डीजे, 5-5 घोड़ी बग्गी, भगवान सांवलिया सेठ का रथ शामिल थे। मार्ग झंडियों व फरियों से सजा था। उधर महाराजा अग्रसेन भवन में आयोजित मुख्य सम्मेलन को संबोधित करते हुए रामस्नेही संत दिग्विजयराम महाराज ने अपने ओजस्वी उद्बोधन से जनसमूह में प्राण फूँक दिए। उन्होंने वर्तमान चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी और कहा "इतिहास गवाह है कि जब-जब हम जातियों और पंथों में बंटे हैं, तब-तब हमारी संस्कृति पर आघात हुआ है। आज समय की पुकार है कि हम संकुचित स्वार्थों को त्यागकर 'हिंदू' के रूप में एक हों। याद रखें— हम बटेंगे तो कटेंगे, और यदि एक रहेंगे तो दुनिया की कोई ताकत हमें झुका नहीं सकती।"आयोजक समिति के सदस्य गोविंद प्रसाद सोडाणी ने बताया कि संघ के 100 वर्ष पूर्ण होना मात्र एक उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के संकल्प को दोहराने का अवसर है। सम्मेलन का मूल उद्देश्य हिंदू समाज को अपनी जड़ों से जोड़ना और आने वाली पीढ़ी को सनातन धर्म के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना रहा। वक्ताओं ने जोर दिया कि धर्म की रक्षा के लिए संगठित समाज ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है।
*सहभोज: जाति-पांत के बंधनों पर प्रहार*
कार्यक्रम के अध्यक्ष अशोक बाहेती व उपाध्यक्ष सीमा सिंघल ने उद्बोधन देते हुए कहा कि सम्मेलन का एक मुख्य आकर्षण'सामूहिक सहभोज' रहा। यहाँ ऊंच-नीच और जाति-भेद की दीवारें ढहती नजर आईं। एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण करते हुए हजारों श्रद्धालुओं ने 'सामाजिक समरसता' का जीवंत उदाहरण पेश किया। यह आयोजन इस संदेश को जन-जन तक पहुँचाने में सफल रहा कि हिंदू समाज एक परिवार है और हम सभी का रक्त एक है।
*समाज का आभार और भविष्य का संकल्प*
कार्यक्रम के अंत में आयोजक समिति ने भारी संख्या में सपरिवार पधारे माताओं, बहनों, युवाओं और बुजुर्गों का आभार व्यक्त किया। संघ के चित्तौड़ प्रांत के कार्यवाह डॉ. शंकर लाल माली ने कहा कि भीलवाड़ा की जनता ने अपनी उपस्थिति से यह सिद्ध कर दिया है कि धर्म और राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण अटूट है। यह सम्मेलन हिंदू जागृति की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
