मां बनास की परिक्रमा की तैयारी: संस्कार निर्माण और सांवरिया सेठ समिति की संयुक्त बैठक

भीलवाड़ा । संस्कार निर्माण सेवा संस्था और सांवरिया सेठ विकास समिति, मंगरोप के तत्वावधान में आज एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आदि-अनादि काल से प्रवाहित हो रही 'मां बनास' की परिक्रमा शुरू करने की योजना बनाना रहा।
बैठक में वक्ताओं ने मां बनास की महिमा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां बनास का अवतरण इस धरती पर मां गंगा से भी पूर्व हुआ था। भगवान श्री रामचंद्र जी के जन्म से पूर्व भी मां बनास अस्तित्व में थीं और विभिन्न पौराणिक कथाओं में इनका संक्षेप में वर्णन मिलता है। संस्थाओं का विचार है कि जिस प्रकार मां नर्मदा की परिक्रमा की जाती है, उसी तर्ज पर अब मां बनास की परिक्रमा भी आयोजित की जाए।
निशान और ध्वज से तय होगा मार्ग
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि परिक्रमा के मार्ग को व्यवस्थित करने के लिए जहां-जहां से मां बनास गुजरती है, उस पूरे मार्ग पर विशेष निशान लगाए जाएंगे। साथ ही, श्रद्धालुओं की सुविधा और मार्ग की पहचान के लिए छोटे-छोटे झंडे (ध्वज) लगाने का भी निर्णय लिया गया है।
ये रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में महाराज बृजेश शास्त्री, ईश्वर जोशी (आटूण), सोहनलाल तेली (हरणी) और बलवंत सिंह (मंगरोप) उपस्थित रहे। साथ ही सांवरिया सेठ मंगरोप के अध्यक्ष भेरुलाल गुर्जर, शंकर सिंह (गुवारड़ी), श्याम लाल गुर्जर और देवीलाल गुर्जर सहित कई गणमान्य जन मौजूद रहे।
