रामस्नेही चिकित्सालय में हर्षोउल्लास से गणतन्त्र दिवस मनाया गया

भीलवाड़ा । स्थानीय रामस्नेही चिकित्सालय में 77 वां गणतन्त्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से मनाया गया। चिकित्सालय के चिकित्सा प्रभारी सतीश भदादा ने बताया कि अन्तर्राष्ट्रीय श्री रामस्नेही सम्प्रदाय के भीलवाड़ा स्थित रामस्नेही चिकित्सालय में सम्प्रदाय के वर्तमान आद्याचार्य जगद्गुरू स्वामी जी श्री 1008 श्री रामदयाल जी महाराज ने ध्वजारोहण कर कार्यक्रम की शुरूआत की। इस अवसर पर आचार्य श्री ने उपस्थित चिकित्सक स्टाॅफ, प्रबन्ध समिति सदस्य, नर्सिंग स्टाॅफ, रामस्नेही काॅलेज आॅफ नर्सिंग के फेकल्टी मेंबर व अन्य उपस्थित कर्मचारियो को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रªकी आचार संहिता व किसी भी सम्प्रदाय की आचार संहिता, संविधान दिवस का एक हिस्सा है। भारत की माटी को नमन करते है। भारत के शहिदों को नमन करते हैं। अर्द्ध शताब्दी बीत जाने पर भी भारत में स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर भी आतंकवाद के काले बादल छाये रहते है, जो कि देश का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है। संत, सैनिक व शिक्षक को देश की रक्षा में हमेशा अलर्ट रहना पड़ता है। देशभक्ति के आक्सीजन से सभी का जीवन संचालित है। आतंकवादी मासूम बच्चों का खून बहाते है। प्रतिवर्ष हम यह कल्पना अभिव्यक्त करते है कि हमारा देश ऊंचा और ऊंचा हो जाए एवं हर हिन्दू विवेकानंद व हर मुसलमान कलाम बन जाएं, हमारा देश ऊंचा और ऊंचा हो जाए। सेवा राष्ट्रª की हो या मानव जगत की हो, जिसके जीवन में चार बिन्दु जीवित है, उसने चारों वेदों का ज्ञान आत्मसात कर लिया है। जिम्मेदारी, जवाबदारी, ईमानदारी और वफादारी, जिसके जीवन में ये चार बिंदु है वह तिरंगे की ऊंचाई की तरह मानव जीवन की ऊंचाई से भी राष्ट्र को देखेगा, यही राष्ट्रª के हर नागरिक से अपेक्षा है। हमने चाहे जिस धर्म में जन्म लिया हो, पर हमारा सबसे बड़ा धर्म राष्ट्र धर्म है। हमारा राष्ट्रª हमेशा ऊंचाई पर जाये, तभी हमारा जीवन सार्थक हो पायेगा।
कोई हस के मरा, कोई रो के मरा।
जिंदगी उसकी अच्छी है, जो राम व राष्ट्र का होके मरा।
और अंत में आचार्य श्री ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को ऑपरेशन सिंदूर के द्वारा आतंकवाद पर वार के लिए साधुवाद दिया।
इस शुभ अवसर पर रामस्नेही संत, रामस्नेही चिकित्सालय प्रबंध समिति सदस्य, चिकित्सक स्टाॅफ, नर्सिंग स्टाॅफ, रामस्नेही काॅलेज आॅफ नर्सिंग के फेकल्टी मेंबर, अन्य कर्मचारी व रामस्नेही सत्संगी जन आदि उपस्थित थे।
