सेवादारों का सम्मान ही सौभाग्य का द्वार, प्रकृति लगाती है नियमों के उल्लंघन पर 'जुर्माना' - संत राधाकृष्ण महाराज

भीलवाड़ा। जोधपुर के प्रसिद्ध गोवत्स संत श्री राधाकृष्ण महाराज ने कहा कि सेवादारों का सम्मान करना केवल नैतिकता नहीं, बल्कि सौभाग्य का द्वार है। जब आप निस्वार्थ भाव से सेवा करने वालों के प्रति कृतज्ञता रखते हैं, तो उनकी दुआएं जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भर देती हैं। यह विचार उन्होंने शहर से 17 किलोमीटर दूर नोगांवा सांवरिया सेठ पावन धाम में आयोजित 'श्रीमद् भागवत समरसता महोत्सव' के दूसरे दिन व्यक्त किए।
प्रकृति के नियम और 'जुर्माना'
कथा के दौरान महाराज श्री ने सचेत किया कि प्रकृति हमारी हर गतिविधि को नोट करती है। जब हम प्राकृतिक नियमों का उल्लंघन करते हैं, तो प्रकृति हम पर 'जुर्माना' लगाती है। उन्होंने झाड़ू को 'लक्ष्मी' का प्रतीक बताते हुए कहा कि हाथ में झाड़ू लेकर समाज स्वच्छ करने वाला व्यक्ति भी माँ भारती की पूजा कर रहा है।
संघ के शताब्दी वर्ष पर विशेष संदेश
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्र के लिए कष्ट उठाने वाला व्यक्ति ही समाज को शीतलता प्रदान करता है। उन्होंने फ्रिज और मटके के जल का उदाहरण देते हुए बताया कि जिस प्रकार कुम्हार के 'ताप' सहने के बाद मटका शीतल जल देता है, उसी प्रकार तपस्या से ही राष्ट्र सेवा संभव है।
दूसरे दिन के मुख्य आकर्षण
प्रभात फेरी: उपनगर पुर से भव्य प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें सफाईकर्मियों का सम्मान किया गया।
प्रदर्शनी: संस्थान की रसायनशाला में 23 वर्षों के गो-संरक्षण और मंदिर निर्माण के संघर्ष की छायाचित्र प्रदर्शनी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही।
भजन संध्या: कुमुद विहार में आयोजित भजन संध्या में श्रद्धालु भजनों पर जमकर झूमे।
गणमान्य उपस्थिति: पूर्व सांसद सुभाष बहेडिया, डॉ. ऋतु बनावत, उद्योगपति बनवारी लाल मुरारका सहित कई गौ-सेवकों ने आशीर्वाद लिया।
आगामी कार्यक्रम की रूपरेखा
29 मार्च: प्रह्लाद चरित्र एवं नृसिंह अवतार कथा।
30 मार्च: श्री कृष्ण जन्मोत्सव और सायं 7 बजे रामस्नेही वाटिका में 'युवा गोष्ठी'।
31 मार्च: बाल कृष्ण लीला, छप्पन भोग व समरसता भोज।
01 अप्रैल: रुक्मणी विवाह प्रसंग।
02 अप्रैल: सुदामा चरित्र के साथ कथा का विश्राम।
