भीलवाड़ा के एमजीएच में क्रांतिकारी बदलाव, अब एक ही छत के नीचे मिलेगी इमरजेंसी सेवाएं

भीलवाड़ा के एमजीएच में क्रांतिकारी बदलाव, अब एक ही छत के नीचे मिलेगी इमरजेंसी सेवाएं
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भीलवाड़ा । महात्मा गांधी चिकित्सालय में बरसों से इलाज के लिए एक वार्ड से दूसरे वार्ड भटकने वाले मरीजों के लिए राहत की बड़ी खबर है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ सहित प्रशासन ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए ट्रोमा सेंटर, एमओटी और इमरजेंसी को एक ही सूत्र में पिरो दिया है। अब एक्सीडेंट, हार्ट अटैक या जहर जैसे गंभीर मामलों में मरीज को 'गोल्डन ऑवर' यानी जीवन बचाने वाले शुरुआती कीमती मिनटों में यहां-वहां भटकना नहीं पड़ेगा।

अस्पताल अधीक्षक डॉ. गौड़ द्वारा जारी नए आदेशों के अनुसार, अब इमरजेंसी विंग की कमान सीधे तौर पर चार दिग्गजों के हाथ में होगी। इसमें सर्जरी, मेडिसिन, हड्डी रोग और एनेस्थीसिया के विशेषज्ञ यह सुनिश्चित करेंगे कि मरीज के अस्पताल पहुंचते ही बिना देरी उसका इलाज शुरू हो जाए। अक्सर देखा जाता है कि गंभीर मरीज को सीधे वार्ड में भेज दिया जाता है, जिससे उसकी जान जोखिम में पड़ जाती है। अब सख्त नियम लागू किया गया है कि जब तक इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार पूरा नहीं होता, मरीज को वार्ड में शिफ्ट नहीं किया जाएगा। यदि किसी ने इन नियमों की अनदेखी की, तो उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार गौड़ का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में अक्सर मरीज सिस्टम की उलझनों में फंसकर जान गंवा देता था। कहीं डॉक्टर नहीं मिलता था तो कहीं वार्ड बॉय नदारद रहते थे। ट्रोमा और एमओटी को एक साथ लाने से अब मैनपावर और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा। यह भीलवाड़ा के चिकित्सा इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। अब इमरजेंसी में केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि हर समय सुरक्षा गार्ड, वार्ड बॉय और हेल्पर तैनात रहेंगे। पूरी व्यवस्था की निगरानी कैमरों के जरिए सीधे कंट्रोल रूम से होगी और डे-नाइट सुपरवाइजर मौके पर मौजूद रहकर हर पल की रिपोर्ट देंगे।

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