अवैध खनन से झर्झर अरावली के लिए 130 करोड़ ऊंट के मुंह में जीरे के समान

भीलवाड़ा |संकला फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान की अरावली पर्वतमाला का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है तथा पिछले 48 वर्षों में 31 पहाड़ियां पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। इसी गंभीर स्थिति के बीच राजस्थान सरकार ने बजट 2026-27 में अरावली संरक्षण के लिए 130 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसे पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने ऊंट के मुंह में जीरे के समान बताया है।

जाजू ने कहा कि अरावली केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं बल्कि राजस्थान की जीवनरेखा है। यदि अरावली समाप्त होती है तो इसका सीधा असर प्रदेश की पारिस्थितिकी, वन्यजीवन, जलस्तर और मौसम चक्र पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि अरावली चंबल, माही, लूणी, बनास और साबरमती जैसी प्रमुख नदियों की जननी भी है।

उन्होंने कहा कि अरावली को सबसे बड़ा नुकसान 2400 खनन लीजों और अवैध खनन से हुआ है। खनन गतिविधियों ने पहाड़ों को खोखला कर दिया है और कई क्षेत्रों में भू-जल स्तर खतरनाक स्तर तक गिर चुका है।

जाजू ने स्पष्ट किया कि हजारों वर्ग किलोमीटर में फैली अरावली के संरक्षण, पुनर्जीवन और अवैध खनन रोकने के लिए 130 करोड़ की राशि बहुत कम है। उन्होंने सरकार से मांग की कि अरावली के लिए एक विशेष मिशन योजना बनाई जाए, जिसमें वैज्ञानिक संरक्षण, व्यापक वृक्षारोपण, जल-संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने चेताया कि यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को केवल अरावली के नाम की याद ही शेष रह जाएगी।

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