सनातन संस्कृति अजर अमर अविनाशी, सनातन हम भारतीयों का जीवन दर्शन

सनातन संस्कृति अजर अमर अविनाशी, सनातन हम भारतीयों का जीवन दर्शन
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भीलवाड़ा, । हमारी सनातन संस्कृति अजर अमर अविनाशी है जिसे कोई मिटा नहीं सकता। हमे इस संस्कृति पर ओर सनातनी होने पर गर्व की अनुभूति होनी चाहिए। हमे आध्यात्मिकता से जुड़कर ही इसकी रक्षा कर सकते है। सनातन संस्कृति केवल परम्पराओं का संग्रह नहीं,बल्कि एक जीवन दर्शन है जिसकी जड़े आध्यात्मिकता में गहराई से समाई हुई है। आध्यात्मिकता के माध्यम से ही सनातन संस्कृति की रक्षा, पुर्नस्थापना ओर प्रसार संभव है। ये विचार रविवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के भीलवाड़ा पथिकनगर केन्द्र के तत्वावधान में आयोजित विशाल साधु संत महासम्मेलन में उभरकर आए। विजयसिंह पथिकनगर स्थित अग्रवाल भवन में तीन घंटे से अधिक समय तक चले इस महासम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में ऋषिकुल धाम जोधपुर के आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. श्री शिव स्वरूपानंदजी महाराज, सहारनपुर से आचार्य महामंडलेश्वर कमलकिशोरजी महाराज, हरिशेवाधाम भीलवाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी श्री हंसारामजी उदासीन, ब्रह्माकुमारी प्रयागराज की धार्मिक प्रभाग अध्यक्ष राजयोगिनी ब्रह्माकुमारीज मनोरमा दीदी एवं ब्रह्माकुमारीज माउंट आबू के धार्मिक प्रभाग मुख्यालय संयोजक ब्रह्माकुमार रामनाथ भाई का सानिध्य एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इस कार्यक्रम में भीलवाड़ा जिले के विभिन्न धर्म स्थलों की सेवा एवं पूजा कार्य करने वाले सैकड़ो संत महात्मा, पुजारी, पंडित, कथावाचक आदि शामिल हुए। इन सभी का ब्रह्ाकुमारीज भीलवाड़ा केन्द्र द्वारा स्वागत किया गया।

महापुरूषों ने किया सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए जीवन समर्पित-महामंडलेश्वर शिव स्वरूपानंद

सम्मेलन में ऋषिकुल धाम जोधपुर के आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. श्री शिव स्वरूपानंद महाराज ने कहा कि हमारे महापुरूषों ने सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए जीवन समर्पित कर दिया। सनातन संस्कृति जनमानस के ह्दय में समाई हुई है। वेद सनातन संस्कृति के मुख्य ग्रंथ है ओर विश्व में सबकुछ वहीं है जो वेदों में बताया गया है। उन्होंने कहा कि संस्कार ओर संस्कृति को जानने पर ही आध्यात्मिकता सनातन की रक्षा कर पाएगी। जब तक देश में भगवाधारी संत है सनातन संस्कृति को कोई मिटा नहीं सकता। जीवन में सनातन आ गया तो आत्मा का दिव्य प्रकाश भी आएगा जिससे पवित्र व पावन कुछ नहीं है।

सनातन करता सबके सुख ओर मंगल की कामना-महामंडलेश्वर हंसाराम उदासीन

सम्मेलन में हरिशेवाधाम भीलवाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी श्री हंसाराम उदासीन ने ब्रह्माकुमारीज संस्था द्वारा सनातन पर कार्यक्रम आयोजित करने पर खुशी जताते हुए कहा कि ये संस्था भी सनातन की ही शाखा है। सनातन सबके सुख की कामना करता है। सुख चाहते है तो सेवा ओर सिमरन करना होगा। उन्होंने कहा कि हम सभी सनातन सभ्यता के अंश है ओर सनातन से प्राचीन कुछ भी नहीं है। इस सृष्टि की रचना हमारे ईश्वर ने की है। राम शब्द सनातन सभ्यता ओर संस्कृति से जोड़ने वाला है। सनातन अजर अमर होने के साथ कोई इसको मिटा नहीं सकता,जिसने इसे मिटाने का प्रयास किया वह समाप्त हो गया। सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए सनातनियों को एकजुट रहना होगा।

मान-अपमान में सम भाव में रहने वाला ही संत आचार्य कमलकिशोर

सहारनपुर से आचार्य महामंडलेश्वर कमलकिशोर महाराज ने दण्डवत प्रणाम से उद्बोधन प्रारंभ करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति दण्डवत कराना सीखाती है। ओम शांति मंत्रों के उच्चारण से सृष्टि में शांति आ सकती है। उन्होंने कहा कि मान-अपमान, यश-अपयश में सम भाव में रहने वाला ही संत होता है। अपने भीतर प्रेम का उदय होने पर क्रोध स्वतः चला जाता है। आत्मा ओर शरीर एक दूसरे के बिना अधूरे है। जीवन में ज्ञान योग श्रेष्ठ है। परमात्मा को प्राप्त करना चाहते है तो उस पर पूर्ण विश्वास भी रखना होगा।

कुछ अधिक पाने की चाह दूर करती आध्यात्मिकता से- मनोरमा दीदी

ब्रह्माकुमारी प्रयागराज की प्रभारी एवं संस्था की धार्मिक प्रभाग अध्यक्ष राजयोगिनी ब्रह्माकुमारीज मनोरमा दीदी ने सनातन संस्कृति को अविनाशी बताते हुए कहा कि महन्त,पंडित, पुजारी इसके बहुत बड़े स्तम्भ है। हमे आत्मा के नैसेर्गिंक गुणों को जानना होगा। आत्मा प्रेम आनंद व कल्याण स्वरूप है। थोड़ा है थोड़े की जरूरत सिद्धांत आध्यात्मिकता से विमुख कर रहा है। उन्होंने कहा कि युद्ध के इस दौर में मानवता चौराहे पर रो रही है ओर चारित्रक संकट आ रहा है। चाहे कुछ न करो पर मन ओर परमात्मा की आवाज अवश्य सुनने का प्रयास करे।

भारत की संस्कृति सनातन दर्शन पर आधारित- रामनाथ भाई

ब्रह्माकुमारीज माउंट आबू के धार्मिक प्रभाग मुख्यालय संयोजक ब्रह्माकुमार रामनाथ भाई ने कहा कि भारत की संस्कृति सनातन दर्शन पर आधारित है। बच्चों को समझाना होगा कि सनातन संस्कृति विश्व में सर्वश्रेष्ठ है ओर इसको अपनाने से किस तरह जीवन का कायाकल्प हो सकता है। सनातन संस्कृति को आचरण में लाने वाली हमारी आत्मा है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान की गहराई में जाने पर वह आचरण में आएगा ओर आत्मा के स्वरूप को समझ पाएंगे। आत्मज्ञान के बिना सनातन को नहीं समझ सकते। मन को जीत लेने पर जगत को जीत सकते है।

राजयोगी युगलों का सम्मान एवं राजयोग की कराई अनुभूति

समारोह में ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय धार्मिक प्रभाग के मध्यप्रदेश जोनल समन्वयक नारायण भाई ने सम्मेलन के विषय से परिचय कराते हुए कहा कि संत महात्माओं के बिना सनातन संस्कृति नहीं रह सकती है। आध्यात्मिक व दिव्य ज्ञान से ही सनातन संस्कृति की रक्षा हो सकती है। प्रयागराज से आई बीके श्रद्धा दीदी ने सम्मेलन में राजयोग की अनुभूति कराते हुए इसके माध्यम से सुखी एवं तनाव रहित जीवन के बारे में बताया। ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के भीलवाड़ा केन्द्र की प्रभारी इन्द्रा बहन ने सम्मेलन के उद्ेश्य की जानकारी देने के साथ अतिथियों का स्वागत करते हुए उनका परिचय दिया। उन्होंने बताया कि भीलवाड़ा में संस्था के 15 केन्द्रों का संचालन हो रहा जहां 23 बहने सेवाएं प्रदान कर रही है। समारोह में 15 वर्ष या उससे अधिक समय से संयमित जीवन जी रहे 30 राजयोगी युगलों का सम्मान किया गया। भोलाराम भाई व इन्द्र आगाल बहन ने राजयोग का अनुभव बताया। संचालन बीके तरूणा दीदी ने किया। आभार बीके अमोलक भाई ने जताया। समारोह के प्रारंभ में ब्रह्मकुमारी बहनों ने सामूहिक स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया। कुमारी साक्षी ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया। बालिका देवांशी ने भी नृत्य प्रस्तुति दी। संस्था की इन्दौर जोन की प्रभारी आरती दीदी ने ऑडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से आशीर्वचन दिया। समारोह के प्रारंभ में अतिथियों ओर संतो ने दीप प्रज्ज्वलित किया। रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा पीठ के पीठाधीश्वर आचार्य रामदयाल महाराज ने भी सम्मेलन के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की।

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