मनरेगा बचाओ संग्राम जनआंदोलन"

भीलवाड़ा । जिला कांग्रेस कमेटी भीलवाड़ा के जिलाध्यक्ष रामलाल जाट के नेतृत्व में मनरेगा बचाओ संग्राम जनआंदोलन की रूपरेखा तैयार कर दी गई है। गांधी भवन जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित बैठक में सभी पदाधिकारियों ने अपने विचार साझा किए और आगामी कार्यक्रमों की रणनीति तय की। बैठक में निर्णय लिया गया कि ग्रामीण आजीविका पर केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा किए गए प्रहार के विरोध में विभिन्न स्तरों पर आंदोलन किया जाएगा, ताकि मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल किया जा सके।
आंदोलन की शुरुआत 10 जनवरी को गांधी भवन में प्रेस कांफ्रेंस से होगी, जिसमें प्रस्तावित कानून के ग्रामीण रोजगार और आजीविका पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को मीडिया के माध्यम से उजागर किया जाएगा। 12 जनवरी को जिला मुख्यालय रेलवे स्टेशन पर डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सर्कल में एक दिवसीय उपवास का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा, 12 से 29 जनवरी तक जिले की सभी ग्राम पंचायतों में चौपालें और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पत्र रोजगार सेवकों और ग्राम प्रधानों के माध्यम से मनरेगा श्रमिकों तक पहुँचाए जाएंगे।
30 जनवरी को जिले के सभी वार्ड और ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरने आयोजित किए जाएंगे, जहां अहिंसा, संवैधानिक मूल्यों और काम के अधिकार पर चर्चा की जाएगी। 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला मुख्यालयों पर जिला कलेक्टर कार्यालयों के समक्ष धरने आयोजित किए जाएंगे। धरनों के समापन पर केंद्रीय VB-GRAM-G विधेयक को वापस लेने और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा जाएगा।
इस कार्यक्रम में जिले के वरिष्ठ नेता, ब्लॉक एवं मंडल अध्यक्ष और सैकड़ों कार्यकर्ता भाग लेंगे। प्रमुख उपस्थितियों में अक्षय त्रिपाठी, गायत्री त्रिवेदी, ओम नरानीवल, राजेंद्र त्रिवेदी, मनीष मेवाड़ा, दुगेश शर्मा, हैप्पी बना, विभा माथुर, गोवर्धन गुर्जर, सुशीला सालवी, चेतन डिडवानिया, मधु जाजू, ईश्वर खोईवाल, रणदीप त्रिवेदी, अविनाश शर्मा, योगेश सोनी, अर्चना दुबे, हरफूल जाट, आशीष राजथला, फ़रियाद मोहम्मद, चंद प्रकाश अमरवाल सहित अन्य कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल होंगे। कार्यक्रम का संचालन महेश सोनी करेंगे।
इस आंदोलन का उद्देश्य मनरेगा के मूल स्वरूप और ग्रामीण रोजगार के अधिकारों की रक्षा करना है। जिला कांग्रेस कमेटी का कहना है कि यह शांतिपूर्ण आंदोलन ग्रामीण जीवन, आजीविका और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी है और इसे सभी स्तरों पर प्रभावशाली बनाने के लिए व्यापक तैयारी की जा रही है।
