मसाला फसलें आज की आवश्यकता - डॉ. यादव

भीलवाड़ा । कृषि विज्ञान केन्द्र भीलवाड़ा पर सुपारी एवं मसाला विकास निदेशालय, कालीकट, केरल एवं अनुसंधान निदेशालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा प्रायोजित एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का आयोजन मसाला फसलों की उन्नत उत्पादन प्रौद्योगिकी विषय पर दिनांक 23 फरवरी, 2026 को आयोजित किया गया। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सी. एम. यादव ने दक्षिणी राजस्थान में मसाला फसलों की महत्ता पर चर्चा करते हुए कृषकों को मसाला फसलों की उपयोगिता एवं उसके उत्पादन वृद्धि कर आमदनी बढ़ाने की आवश्यकता प्रतिपादित की।
डॉ. के. सी. नागर, आचार्य-शस्य विज्ञान, बारानी कृषि अनुसंधान केन्द्र, आरजिया ने मसाला फसलों की उन्नत खेती के महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करते हुए समन्वित खरपतवार प्रबन्धन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। डॉ. रविकान्त शर्मा, सह निदेशक अनुसंधान, अनुसंधान निदेशालय उदयपुर ने मसाला फसलों की जैविक खेती के महत्त्वपूर्ण पहलुओं चर्चा की।
डॉ. सुचित्रा दाधीच, सहायक आचार्य उद्यान, कृषि महाविद्यालय भीलवाड़ा ने बीजीय मसालों में कटाई उपरान्त प्रबन्धन की जानकारी के साथ ही उन्नत सब्जी उत्पादन द्वारा आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया। डॉ. अभय दशोरा, सहायक आचार्य एवं परियोजना प्रभारी, आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन, राजस्थान कृषि महाविद्यालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर ने परियोजना के उद्देश्य को बताते हुए प्रमुख बीजीय मसालों जैसे मेथी, धनियाँ, जीरा एंव सौंफ की विभिन्न किस्मों की जानकारी दी। प्रशिक्षण में 51 कृषक एवं कृषक महिलाओं ने भाग लिया जिन्हें विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषि कलेण्डर दिया गया।
