भीलवाड़ा: आधी-अधूरी तैयारियों के बीच शुरू हुई ट्रैफिक लाइट व्यवस्था बनी जी का जंजाल

भीलवाड़ा। नगर विकास न्यास और यातायात शाखा द्वारा शहर में शुरू की गई नई ट्रैफिक लाइट व्यवस्था राहत के बजाय राहगीरों और वाहन चालकों के लिए मुसीबत साबित हो रही है। आधी-अधूरी तैयारियों और तकनीकी खामियों के चलते शहर के प्रमुख चौराहों पर अव्यवस्था का आलम बना हुआ है।
शहर की पांच लाख की आबादी और सड़कों पर दौड़ते एक लाख से अधिक वाहनों के दबाव को देखते हुए सालों पुरानी लाइटों को हटाकर नई लाइटें लगवाई गई थीं। प्रशासन ने गायत्री आश्रम, अजमेर पुलिया और गंगापुर चौराहा पर संचालन शुरू किया, लेकिन इसके परिणाम संतोषजनक नहीं रहे।
ट्रायल में फेल हुई अजमेर पुलिया की लाइट
न्यास ने आनन-फानन में लाइटें पुलिस को हैंडओवर तो कर दीं, लेकिन अजमेर पुलिया चौराहे की लाइट ट्रायल के दौरान ही फेल हो गई। वहीं, गंगापुर और गायत्री आश्रम चौराहे पर वाहन चालकों के रुकने के लिए न तो सफेद लाइन (स्टॉप लाइन) खींची गई है और न ही पैदल चलने वालों के लिए जेब्रा क्रॉसिंग बनाई गई है।
अव्यवस्थाओं के बीच यातायात:
गायत्री आश्रम चौराहा: यहां ट्रैफिक लाइट का सिस्टम पूरी तरह फेल नजर आ रहा है। न तो टाइमिंग सही है और न ही वाहन चालक नियमों का पालन कर रहे हैं।
गंगापुर चौराहा: यहां पर्याप्त जगह न होने के कारण रेड लाइट होते ही टेक्सटाइल मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। सर्किट हाउस की तरफ जाने वाला मार्ग फ्री जोन होने के बावजूद रेड लाइट पर चालकों को रुकना पड़ता है, जिससे जाम की स्थिति बनती है।
संकेतकों का अभाव: पैदल यात्रियों के लिए किसी भी प्रकार के संकेतक नहीं लगाए गए हैं, जिससे दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।
यातायात पुलिस का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के दबाव में बिना पूरी तैयारी के संचालन शुरू कर दिया गया है। जब तक चौराहों का चौड़ीकरण, लाइनों का अंकन और टाइमिंग का सही तालमेल नहीं होगा, तब तक यह व्यवस्था सुचारू नहीं हो पाएगी।
