सरकारी स्कूलों में खलबली –: एक लाख शिक्षकों पर मंडराया TET का संकट, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से नौकरी खतरे में!

एक लाख शिक्षकों पर मंडराया TET का संकट, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से नौकरी खतरे में!
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राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे करीब **एक लाख तृतीय श्रेणी शिक्षक** अब नई मुश्किल में फंस गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के सितंबर माह के ताज़ा फैसले ने इन शिक्षकों की नींद उड़ा दी है। आदेश के मुताबिक, **2012 या उससे पहले नियुक्त हुए तृतीय श्रेणी शिक्षकों को अब अध्यापक पात्रता परीक्षा (TET/REET) देनी होगी**।

इसका सीधा मतलब है कि वर्षों से बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को अपनी नौकरी बचाने के लिए अब खुद किताबें थामनी पड़ेंगी।

#### **किन पर लागू होगा फैसला?**

* सुप्रीम कोर्ट का आदेश केवल *तृतीय श्रेणी शिक्षकों* पर लागू होगा।

* *सिविल सैकंड ग्रेड और व्याख्याताओं* पर इसका असर नहीं होगा।

* 2012 के बाद नियुक्त हुए शिक्षक पहले ही TET/REET पास कर चुके हैं, इसलिए वे इससे प्रभावित नहीं होंगे।

* संकट सिर्फ उन शिक्षकों पर है जो **2012 से पहले नियुक्त** हुए थे।

#### **TET से REET तक की कहानी**

राजस्थान में जब पहली बार अध्यापक पात्रता परीक्षा (TET) लागू हुई थी तो कई जिलों में भारी विरोध हुआ था। झुंझुनूं में तो भाजपा नेताओं ने कलक्ट्रेट पर आमरण अनशन तक किया था। बाद में TET का नाम बदलकर राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा (REET) कर दिया गया, लेकिन विवाद वहीं का वहीं रहा।

#### **शिक्षकों की बेचैनी और मांग**

अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षक संगठनों ने आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है –

*"हमारी मांग है कि राज्य सरकार और केन्द्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के 1 सितम्बर 2025 के फैसले पर रिव्यू पिटिशन दाखिल करें। इससे प्रदेश के लाखों शिक्षकों को राहत मिलेगी।"*

#### **बड़ा सवाल**

क्या 10-15 साल से स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षक अब भी अयोग्य माने जाएंगे?

क्या बच्चों को पढ़ाने वाले इन शिक्षकों को अपनी नौकरी बचाने के लिए फिर से परीक्षा की कतार में खड़ा करना न्यायोचित है?


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