कोटड़ी श्याम के द्वार पर गलत दिशा दिखा रहा विभाग का बोर्ड, एक साल से राह भटक रहे लोग

आकोला ( रमेश चंद्र डाड) कोटड़ी (भीलवाड़ा) मेवाड़ के प्रसिद्ध आस्था धाम श्री कोटड़ी चारभुजा नाथ मंदिर में राजस्थान ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से भी हजारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन, मंदिर के पास लालबाई-पुलबाई चौराहे पर लगा एक सरकारी साइनबोर्ड पिछले एक साल से यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बना हुआ है। बोर्ड पर अंकित गलत दिशा-निर्देशों के कारण बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालु रास्ता भटक रहे हैं।
सवाईपुर-भीलवाड़ा मार्ग की जगह पहुंच रहे गांवों में
चौराहे पर लगे बोर्ड के अनुसार, पहले नंबर के रास्ते को सवाईपुर, बनका खेड़ा और भीलवाड़ा की ओर जाने वाला मार्ग बताया गया है। जबकि धरातल पर वास्तविकता यह है कि यह रास्ता धायलों का खेड़ा और बलिया खेड़ा की ओर जाता है। जो भक्त भीलवाड़ा या सवाईपुर जाना चाहते हैं, वे इस गलत बोर्ड को देखकर गांवों की ओर निकल जाते हैं।
किलोमीटर दूर जाकर लेना पड़ता है यू-टर्न
गलत रास्ते पर जाने के बाद श्रद्धालुओं को कई किलोमीटर तक कोई मोड़ नहीं मिलता। अंततः काफी दूर जाने के बाद उन्हें अहसास होता है कि वे गलत दिशा में आ गए हैं, जिसके बाद उन्हें यू-टर्न लेकर वापस आना पड़ता है। स्थानीय लोगों से रास्ता पूछने के बाद ही यात्री सही मार्ग पर लग पाते हैं। इससे न केवल उनका समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि उन्हें मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है।
क्या है वास्तविक स्थिति और बोर्ड की बड़ी चूक?
तस्वीरों और स्थानीय भौगोलिक स्थिति के अनुसार रास्तों का विवरण इस प्रकार होना चाहिए, जो बोर्ड पर गलत अंकित है:
प्रथम रास्ता: धायलों का खेड़ा, बलिया खेड़ा (बोर्ड पर इसे सवाईपुर-भीलवाड़ा बताया गया है)।
द्वितीय रास्ता: सवाईपुर, बनका खेड़ा, भीलवाड़ा।
तृतीय रास्ता: बड़ा महुआ, बनेड़ा, हुरड़ा।
चौथा रास्ता: नन्दराय, बिगोद, मांडलगढ़ (जहाँ से फोटो लिया गया है)।
जवाबदेही किसकी
लापरवाही का जिम्मेदार कौन: जब यह बोर्ड कस्बे के मुख्य लालबाई-पुलबाई चौराहे पर स्थित है, तो पिछले एक साल में प्रशासन की नजर इस बड़ी गलती पर क्यों नहीं पड़ी?
श्रद्धालुओं की परेशानी: क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इस बात का अहसास है कि कोटड़ी श्याम के दर्शन करने आए भक्त सवाईपुर जाने के फेर में बलिया खेड़ा के रास्तों पर भटक रहे हैं?
सुधार में देरी क्यों: यदि यह बोर्ड तकनीकी रूप से गलत है, तो पंचायत या संबंधित विभाग ने इसे अब तक दुरुस्त क्यों नहीं करवाया? क्या किसी बड़े हादसे या यात्रियों के भारी विरोध का इंतजार किया जा रहा है?
