गांवों में लौटेगी बैलगाड़ी की कि रुन –झुन आवाज़,: सरकार देगी बैलों से खेती करने वाले किसानों को 30 हजार

भीलवाड़ा हलचल।
ट्रैक्टर की कर्कश आवाज़ के बीच अब गांवों में फिर से बैलगाड़ी की **किर्रू–झुन** गूंज सुनाई दे सकती है। खेतों में हल जोतते किसान और बैलों का पुराना नजारा लौटाने की पहल राज्य सरकार ने की है।
ग्रीन बजट घोषणा के तहत बैलों से खेती करने वाले किसानों को **30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि** दी जाएगी। इसके लिए किसानों से 25 सितंबर 2025 तक ऑफलाइन आवेदन** लिए जाएंगे। 26 सितंबर को ग्राम पंचायत स्तर पर **लॉटरी प्रणाली** से पात्र किसानों का चयन होगा, जिसमें पंचायत प्रशासक, कृषि पर्यवेक्षक, ग्राम विकास अधिकारी और पटवारी मौजूद रहेंगे।
योजना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
पारंपरिक खेती को पुनर्जीवित करना: ट्रैक्टरों और आधुनिक मशीनों के बढ़ते उपयोग से बैलों की संख्या घट रही है। यह योजना किसानों को बैल-आधारित जैविक खेती की ओर लौटने के लिए प्रेरित करेगी।
गोपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती: छोड़े गए बछड़ों को बैल बनाकर उपयोगी बनाने से पशुपालन बढ़ेगा, जिससे ग्रामीण रोजगार और आय में वृद्धि होगी।
पर्यावरण संरक्षण: बैलों से जुताई डीजल की खपत कम करेगी, प्रदूषण घटाएगी और मिट्टी की उर्वरता बरकरार रखेगी।
योजना ग्रीन बजट के अंतर्गत है और ऑफलाइन आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं।
पात्रता शर्तें
किसानों को निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे:
एक जोड़ी (2 बैल) का होना आवश्यक।
खेती हेतु भूमि का स्वामित्व प्रमाण।
तहसीलदार द्वारा जारी लघु/सीमांत किसान प्रमाण पत्र।
पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा बैलों का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र।
आधार कार्ड और जन आधार कार्ड की प्रति।
जन आधार से लिंक बैंक खाते की प्रति।
100 रुपये के नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पर शपथ पत्र।
आवेदन प्रक्रिया
कहां आवेदन करें: नजदीकी कृषि पर्यवेक्षक कार्यालय में ऑफलाइन आवेदन जमा करें।
आवश्यक जानकारी: आवेदन फॉर्म में नाम, आधार नंबर, जन आधार नंबर, मोबाइल नंबर और कृषक श्रेणी दर्ज करें।
अंतिम तिथि: 25 सितंबर 2025 तक आवेदन जमा करें।
चयन प्रक्रिया: 26 सितंबर 2025 को ग्राम पंचायत स्तर पर लॉटरी सिस्टम से चयन होगा। लॉटरी में पंचायत प्रशासक, कृषि पर्यवेक्षक, ग्राम विकास अधिकारी और पटवारी उपस्थित रहेंगे।
राशि वितरण: चयनित किसानों को 30,000 रुपये सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित होंगे। यह राशि बैलों के चारे, चिकित्सा और देखभाल पर खर्च की जा सकती है।
सत्यापन: बैलों का भौतिक सत्यापन कृषि, पशुपालन विभाग और ग्राम पंचायत के संयुक्त दल द्वारा किया जाएगा।
योजना की प्रमुख विशेषताएं
छोटे किसानों के लिए आर्थिक सहारा: लघु/सीमांत किसानों को महंगे यंत्रों की बजाय बैलों से कम लागत वाली खेती का विकल्प मिलेगा।
जैविक खेती को प्रोत्साहन: रासायनिक खेती कम होकर प्राकृतिक पद्धतियां बढ़ेंगी।
पशु बीमा का प्रावधान: योजना में बैलों का बीमा अनिवार्य है, लेकिन प्रक्रिया स्पष्ट करने की जरूरत है।
'पहले आओ, पहले पाओ' आधार: आवेदनों की संख्या सीमित होने पर प्राथमिकता मिलेगी।
ग्रामीण जीवन में बदलाव: गांवों में बैलों की वापसी से सांस्कृतिक और आर्थिक संतुलन बनेगा।
