भीलवाड़ा में कड़ाके की ठंड का असर, महात्मा गांधी अस्पताल की मेडिकल ओपीडी में मरीजों की भीड़

भीलवाड़ा। राजस्थान में सर्दी के तेवर तेज होते ही जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। भीलवाड़ा जिले में लगातार गिरते तापमान और शीतलहर का सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर देखने को मिल रहा है। जिले के सबसे बड़े महात्मा गांधी अस्पताल में इन दिनों सर्दी से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ गई है।
अस्पताल की मेडिकल ओपीडी में रोजाना भारी भीड़ उमड़ रही है। हालात यह हैं कि हर दूसरा मरीज खांसी, जुकाम, बुखार, बदन दर्द और वायरल संक्रमण की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहा है। अस्पताल के गलियारों में लगी लंबी कतारें इस बात का साफ संकेत हैं कि बदलता मौसम लोगों की सेहत पर सीधा असर डाल रहा है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार तापमान में अचानक आई गिरावट के कारण अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के मामले तेजी से बढ़े हैं। मेडिकल ओपीडी में आने वाले कुल मरीजों में से करीब 70 से 80 प्रतिशत मरीज सर्दी से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों में निमोनिया के शुरुआती लक्षण भी सामने आ रहे हैं, जिससे चिकित्सकों की चिंता बढ़ गई है।
दिलचस्प बात यह है कि जहां मेडिकल ओपीडी में पैर रखने तक की जगह नहीं है, वहीं अस्पताल के अन्य विभागों जैसे चर्म रोग, ईएनटी और सामान्य सर्जरी की ओपीडी में मरीजों की संख्या सामान्य से कम देखी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि भीषण ठंड के कारण लोग गैर जरूरी स्थिति में घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं। केवल वही मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं जिन्हें तुरंत इलाज की आवश्यकता है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार मेडिकल ओपीडी पर बढ़ता दबाव स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ लगातार बढ़ती मरीजों की संख्या को संभालने में जुटे हुए हैं। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
चिकित्सकों ने लोगों को सलाह दी है कि वे सुबह और शाम के समय ठंडी हवाओं से बचें। गर्म कपड़े पहनें, गरम पेय पदार्थों का सेवन करें और ठंडी चीजों से परहेज करें। किसी भी तरह के सर्दी, खांसी या बुखार के लक्षण दिखने पर लापरवाही न बरतें और समय पर चिकित्सक से संपर्क करें।
महात्मा गांधी अस्पताल की मौजूदा स्थिति यह स्पष्ट करती है कि सर्दी का असर अब केवल मौसम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। ऐसे में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि लोग सतर्क रहें और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें, तो इस सर्दी के प्रकोप से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है। प्रशासन और आमजन के सहयोग से ही इस मौसम की मार का प्रभावी मुकाबला संभव है।
