नगर निगम के स्वच्छ और सुंदर शहर के दावे खोखले साबित

भीलवाड़ा। नगर निगम द्वारा शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के किए गए दावे और वादे हकीकत में दूर की कौड़ी साबित हो रहे हैं। न तो शहर की सड़कों का निर्माण पूरा हो सका, न ही गंदगी से राहत मिली और न ही ड्रेनेज व्यवस्था दुरुस्त हो पाई। नतीजा यह है कि शहरवासी पहले से अधिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं और लाखों समस्याओं के बीच आज भी विकास की आस लगाए बैठे हैं।
नगर निगम ने शहरवासियों को बेहतर सुविधाओं का सपना दिखाते हुए बड़े-बड़े विकास कार्यों के वादे किए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। शहर की अधिकतर सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। सुबह से शाम तक उड़ती धूल लोगों को बीमारियों की सौगात दे रही है, जिससे आमजन का जीवन दूभर हो गया है।
शहर के चेम्बर और नालों की स्थिति भी जस की तस बनी हुई है। कई क्षेत्रों में चेम्बरों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। मानसून तो दूर, वर्तमान हालात में ही एक दर्जन से अधिक कॉलोनियां उफनते गंदे पानी और बदबू से जूझ रही हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
नगर परिषद द्वारा चलाया गया अतिक्रमण हटाओ अभियान भी शहरवासियों को कोई ठोस राहत नहीं दे सका। आज भी शहर अतिक्रमण की मार से कराह रहा है। शुरुआत में सड़कों को चौड़ा करने के नाम पर अभियान शुरू किया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों में यह कार्रवाई सीमित क्षेत्रों तक सिमट कर रह गई।कुल मिलाकर शहर की हालत बद से बदतर होती जा रही है और नगर निगम के दावों पर अब शहरवासी सवाल खड़े करने लगे हैं।
दावों के खोखले होने के मुख्य कारण:
कचरा प्रबंधन में विफलता: घर-घर से कचरा उठाने और उसके वैज्ञानिक निपटान की व्यवस्था अक्सर ठीक नहीं होती, जिससे सड़कों और खुले स्थानों पर कूड़ा पड़ा रहता है।
नालियों और सड़कों की सफाई: निगम के दावे के बावजूद, नालियों में कचरा जमा रहता है और सड़कें गंदी दिखती हैं, जिससे जल निकासी की समस्या और गंदगी बढ़ती है।
नागरिकों की शिकायतें: मोहल्ले की नियमित सफाई न होने पर नागरिक नगर निगम अधिकारियों को पत्र लिखते हैं और सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर अपनी शिकायतें दर्ज कराते हैं।
स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग का विरोधाभास: कुछ शहर स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंक हासिल करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सफाई की स्थिति चिंताजनक बनी रहती है।
अधूरे विकास कार्य: पार्क, सड़कें और अन्य सार्वजनिक स्थानों के सौंदर्यीकरण के दावे पूरे नहीं हो पाते, या समय के साथ उनकी हालत खराब हो जाती है।
