बरूंदनी क्षेत्र में देशी गुड़ बनाने की पुरानी परंपरा जारी

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By - मदन लाल वैष्णव |25 Feb 2026 5:11 PM IST
आकोला (रमेश चंद्र डाड) एक जमाना था जब क्षेत्र में जल की प्रचुरता के कारण गन्ने की खेती बहुतायत से होती थी। गांवों में जगह-जगह गन्ने की पिलाई के लिए बैलों द्वारा खींची जाने वाली चरखी चलती थी। धीरे-धीरे भूगर्भीय जल की कमी होने से गन्ने की खेती प्रभावित हुई और चरखियों का उपयोग लगभग बंद हो गया।
समय के साथ तकनीक में बदलाव आया। बैलों की जगह बिजली की मोटर और डीजल इंजन से चलने वाली चरखी ने ले ली। फिर भी किसानों के हाथों बनाई गई देशी गुड़ की गुणवत्ता और उसका स्वाद आज भी अलग पहचान रखता है। गांवों में देशी पतले गुड़ की मांग बनी हुई है। मक्का की रोटी के साथ चूर करके इसे खाने का अपना ही आनंद है।
बरूंदनी क्षेत्र में एक चरखी पर किसान आज भी पारंपरिक तरीके से देशी गुड़ तैयार करते हुए दिखाई देते हैं।
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