सुंदरकांड के स्वरों से गुंजायमान हुआ पांडाल, जनसैलाब ने लिया भारत को विश्व गुरु बनाने का संकल्प

सुंदरकांड के स्वरों से गुंजायमान हुआ पांडाल, जनसैलाब ने लिया भारत को विश्व गुरु बनाने का संकल्प
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भीलवाड़ा। स्व. गीतादेवी तोषनीवाल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा महोत्सव के अंतर्गत शनिवार की रात भक्ति और राष्ट्रभक्ति के अनूठे संगम की गवाह बनी। नैनौराधाम के राष्ट्रीय संत डॉ. मिथिलेश नागर के मुखारबिंद से जब संगीतमय सुंदरकांड का पाठ शुरू हुआ, तो समूचा वातावरण संकटमोचन हनुमानजी के जयकारों से गूँज उठा। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में मालवा-मेवाड़ सहित महाराष्ट्र और गुजरात से आए हजारों श्रद्धालुओं ने सुंदरकांड पारायण एवं महामंत्र जाप में आहुति दी।

संस्कृति और कुटुंब प्रबोधन पर जोर

कार्यक्रम के दौरान डॉ. मिथिलेश नागर ने समाज में बढ़ती दूरियों पर चिंता व्यक्त करते हुए 'कुटुंब प्रबोधन' का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि आज मोबाइल और भागदौड़ के युग में पारिवारिक संस्कार लुप्त हो रहे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि परिवार के सभी सदस्य सप्ताह में कम से कम एक दिन एक साथ बैठकर भोजन अवश्य करें। साथ ही, उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को आज की महती आवश्यकता बताते हुए नागरिकों को इसके प्रति जागरूक रहने का संकल्प दिलाया।

पाश्चात्य सभ्यता छोड़ 'स्व' को पहचानने की अपील

संत नागर ने सनातन संस्कृति और हिंदुत्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज जब पश्चिमी देश भारतीय अध्यात्म को अपना रहे हैं, तब हमें अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा। उन्होंने राष्ट्रभक्ति का अलख जगाते हुए कहा कि हमारे महापुरुषों ने जिस कांटों भरे मार्ग पर चलकर बलिदान दिए, उस पर चलकर हमें भारत माता को 'परम वैभव' तक पहुँचाना है।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

आयोजन में संत दिग्विजयरामजी महाराज का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में ट्रस्ट के रामस्वरूप तोषनीवाल, दीपक कुमार, शुभम और नंदन तोषनीवाल सहित पूरे तोषनीवाल परिवार का विशेष सहयोग रहा। सर्व सुख-शांति और जन-कल्याण की मंगलकामना के साथ इस भव्य आयोजन का समापन हुआ।

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