साधु संत महासम्मेलन से देंगे आध्यात्मिकता द्वारा सनातन संस्कृति की रक्षा का संदेश,15 मार्च को होगा आयोजन

साधु संत महासम्मेलन से देंगे आध्यात्मिकता द्वारा सनातन संस्कृति की रक्षा का संदेश,15 मार्च को होगा आयोजन
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भीलवाड़ा। सनातन संस्कृति केवल परम्पराओं का संग्रह नहीं,बल्कि एक जीवन दर्शन है जिसकी जड़े आध्यात्मिकता में गहराई से समाई हुई है। आध्यात्मिकता के माध्यम से ही सनातन संस्कृति की रक्षा, पुर्नस्थापना ओर प्रसार संभव है। इसी भावना के साथ प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के भीलवाड़ा पथिकनगर केन्द्र के तत्वावधान में 15 मार्च को विशाल साधु संत महासम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।

विजयसिंह पथिकनगर स्थित अग्रवाल भवन में सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक होने वाले महासम्मेलन को लेकर तैयारियां प्रारंभ हो गई है। इस आयोजन में ऋषिकुल धाम जोधपुर के आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. श्री शिव स्वरूपानंदजी महाराज, सहारनपुर से आचार्य महामंडलेश्वर कमलकिशोरजी महाराज, हरिशेवाधाम भीलवाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी श्री हंसारामजी उदासीन, ब्रह्माकुमारी प्रयागराज की धार्मिक प्रभाग अध्यक्ष राजयोगिनी ब्रह्माकुमारीज मनोरमा दीदी एवं ब्रह्माकुमारीज माउंट आबू के धार्मिक प्रभाग मुख्यालय संयोजक ब्रह्माकुमार रामनाथ भाई का सानिध्य एवं मार्गदर्शन प्राप्त होगा। ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के भीलवाड़ा केन्द्र की प्रभारी बीके इंदिरा दीदी ने बताया कि संतों द्वारा आशीर्वचन के बाद राजयोगी युगलों का सम्मान किया जाएगा। समारोह में राजयोगानुभूति के माध्यम से सुखी एवं तनाव रहित जीवन के बारे में बताया जाएगा। इस कार्यक्रम में भीलवाड़ा जिले के विभिन्न धर्म स्थलों की सेवा एवं पूजा कार्य करने वाले संत महात्मा, पुजारी, पंडित आदि शामिल होंगे। इसके माध्यम से उनको समझाया जाएगा कि किस तरह आध्यात्मिकता के सहारे सनातन संस्कृति की रक्षा का कार्य किया जा सकता है। भीलवाड़ा में पहली बार हो रहे इस तरह के आयोजन को लेकर सनातन धर्म के आधार समझने वाले संत महात्मा एवं पंडित पुजारी वर्ग में उत्साह का माहौल है। ब्रह्ाकुमारीज भीलवाड़ा केन्द्र से जुड़े भाई बहन अधिकाधिक संत महात्माओं ओर पुजारियों से सम्पर्क कर उन्हें इस आयोजन में सहभागिता के लिए प्रेरित कर रहे है।

महासम्मेलन में सानिध्य प्रदान करने आ रहे अतिथियों का परिचय

महामंडलेश्वर डॉ. शिव स्वरूपानंदजी महाराजः ऋषिकुल धाम जोधपुर के आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. शिव स्वरूपानंदजी महाराज श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महामंडलेश्वर होने के साथ ऋषिकुलधाम के पीठाधीश्वर है। वह भारतीय युवा साधु संगठन के अध्यक्ष, विरक्त सन्यासी परिषद के उपाध्यक्ष, विश्व हिन्दु परिषद के राष्ट्रीय सलाहकार का दायित्व संभालने के साथ हिन्दू धर्म आचार्य सभा, हिन्दू धर्म संसद एवं धर्म रक्षा मंच के भी सदस्य है।

संत कमलकिशोरजी महाराजः परम तत्ववेत्ता संत कमलकिशोरजी महाराज ऐसे जीवंत गुरू माने जाते है जिनसे प्रेम से परिपूर्ण समर्पण के साथ सम्पर्क में आते ही शारीरिक, मानसिक, आत्मिक एवं आध्यात्मिक बाधाएं अपने आप समाप्त होने लगती है। वह सबसे प्रेम करते है क्योंकि वह मानते है उनके पास देने के लिए मात्र प्रेम है। इंसान वहीं तो दे सकता है जो उसके पास होता है। आयुर्वेद के सम्पूर्ण ज्ञाता एवं शांति प्रदाता होने के साथ वह विभिन्न धर्म ग्रंथों एवं महापुरूषों के जीवन का भी गहराई से अध्ययन कर चुके है।

ब्रह्माकुमार रामनाथ भाईः ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू के धार्मिक सेवा प्रभाग के मुख्यालय संयोजक के रूप में सेवाएं प्रदान कर रहे ब्रह्माकुमार रामनाथ भाई ने आध्यात्मिकता में अनुपम रूचि होने के साथ भारतीय दर्शन एंव विश्व के विभिन्न धर्मो का गहन अध्ययन किया है। वह 1990 से संस्था के धार्मिक सेवा प्रभाग के विभिन्न सम्मेलनों का आयोजन राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर करते आए है। मन की शांति के लिए राजयोग मेडिटेशन द्वारा देश दुनिया के विभिन्न सेवा स्थानों पर जाकर सेवाएं की है।

महामंडलेश्वर स्वामी हंसारामजी उदासीनः हरिशेवा धाम भीलवाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी हंसारामजी उदासीन सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए जन-जन को जागरूक करने के कार्य में लंबे समय से लगे हुए है। एक संगत,एक पंगत, एक भेष ओर एक भूषा की थीम के साथ आप जात पांत का भेद मिटा सभी सनातनियों को जोड़ने का कार्य कर रहे है। सनातन एकता के इसी लक्ष्य से हाल ही भीलवाड़ा में 19 से 26 फरवरी तक भव्य सनातन मंगल महोत्सव का आयोजन भी किया गया था।

राजयोगिनी ब्रह्माकुमारीज मनोरमा दीदीः ब्रह्माकुमारीज के धार्मिक विंग की अध्यक्ष एवं प्रयागराज सेंटर की प्रभारी बीके मनोरमा दीदी ने राजयोग जैसे गहन विषय को सरल व वैज्ञानिक प्रद्धति से समझाते हुए देश विदेश के अनेक लोगों को जीवन जीने की सही प्रद्धति का ज्ञान प्रदान किया है। आप से प्रेरित होकर कई लोग राजयोग एवं आध्यात्मिकता को गहराई से समझने के लिए जुड़े है।

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