भीलवाड़ा टेक्सटाइल उद्योग पर मंडराया युद्ध का साया, मेवाड़ चैम्बर ने आरबीआई से मांगी बड़ी राहत

भीलवाड़ा । मध्य-पूर्व में चल रहे भीषण युद्ध के हालातों ने दक्षिणी राजस्थान के मैनचेस्टर कहे जाने वाले भीलवाड़ा के वस्त्र उद्योग की कमर तोड़ दी है। वैश्विक व्यापार मार्ग बाधित होने और भुगतान संकट गहराने के चलते मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने गुहार लगाई है।
छह महीने के मोरेटोरियम की मांग
मेवाड़ चैम्बर के मानद महासचिव आर.के. जैन ने आरबीआई गवर्नर को पत्र लिखकर उद्योगों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज और ऋण अदायगी में छूट की मांग की है। जैन ने बताया कि युद्ध के कारण निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे कंपनियों के पास वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) का अभाव हो गया है। चैम्बर ने आग्रह किया है कि टर्म लोन की किश्तों और ब्याज के भुगतान के लिए 6 महीने का मोरेटोरियम (ऋण स्थगन) दिया जाए।
एनपीए नियमों में ढील की जरूरत
चैम्बर ने अपने प्रतिवेदन में स्पष्ट किया है कि उद्योगों की वित्तीय स्थिति को देखते हुए MSME और बड़े उद्योगों के लिए एनपीए (NPA) घोषित करने की समय सीमा में कम से कम एक साल की ढील दी जानी चाहिए। साथ ही, यह भी मांग की गई है कि मोरेटोरियम की अवधि के दौरान कोई अतिरिक्त दंडात्मक ब्याज न वसूला जाए और इस राहत का लाभ उन खातों को भी मिले जो पहले से एनपीए श्रेणी में हैं।
वर्किंग कैपिटल और ड्राइंग पावर
बैंकों को निर्देश देने का आग्रह किया गया है कि वे वर्तमान संकट को देखते हुए निर्यातकों की जरूरतों का विशेष मूल्यांकन करें। ड्राइंग पावर मानदंडों में लचीलापन लाने से उद्यमियों को नकदी के संकट से उबरने में मदद मिलेगी। मेवाड़ चैम्बर का मानना है कि यदि समय रहते केंद्र सरकार और आरबीआई ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो भीलवाड़ा का वस्त्र उद्योग एक बड़े संकट की चपेट में आ सकता है।
