सांगानेर में वर्षों पुरानी गैर नृत्य की परंपरा आज भी जीवंत, रावला चौक में उमड़ रहा उत्साह
भीलवाड़ा। जिले के निकटवर्ती सांगानेर गांव में अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का जज्बा आज भी बरकरार है। यहाँ वर्षों पुराना पारंपरिक 'गैर नृत्य' का आयोजन आज भी पूरी भव्यता के साथ संचालित किया जा रहा है, जो ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
सांगानेर के रावला चौक में आयोजित होने वाला यह गैर नृत्य होली के दूसरे दिन से शुरू होकर फूलडोल अमावस्या तक निरंतर चलता है। इस पारंपरिक आयोजन की खास बात यह है कि इसमें आयु का कोई बंधन नहीं है; गाँव के बुजुर्गों से लेकर युवा तक सभी पारंपरिक वेशभूषा में हाथों में डंडे लिए ढोल की थाप पर थिरकते नजर आते हैं। पूरा गांव इस दौरान रावला चौक में एकत्रित होता है, जिससे माहौल उत्सवमय हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है और नई पीढ़ी भी इसे उतने ही उत्साह के साथ आगे बढ़ा रही है।
