चीड़ खेड़ा में पानी को लेकर मचा हाहाकार, डेढ़ महीने से बूंद-बूंद को तरस रहे ग्रामीण, जिम्मेदारों पर उठे बड़े सवाल

चीड़ खेड़ा में पानी को लेकर मचा हाहाकार, डेढ़ महीने से बूंद-बूंद को तरस रहे ग्रामीण, जिम्मेदारों पर उठे बड़े सवाल
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भीलवाड़ा प्रकाश चंद्र,भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायत चीड़ खेड़ा इन दिनों भीषण पेयजल संकट से जूझ रही है। सरकारी योजनाओं और “जल ही जीवन” जैसे बड़े-बड़े दावों के बीच गांव की जमीनी हकीकत पूरी तरह अलग नजर आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पिछले करीब एक साल से पानी सप्लाई व्यवस्था चरमराई हुई है, वहीं पिछले डेढ़ महीने से हालात इतने खराब हो गए हैं कि कई घरों तक पानी पहुंचना पूरी तरह बंद हो चुका है।

गांव में जगह-जगह सूखे पड़े नल, खाली टंकियां और बर्तनों की कतारें प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलती नजर आ रही हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए रोज संघर्ष करना पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों को सुबह-सुबह कई किलोमीटर दूर तक जाकर पानी लाना पड़ रहा है, जिससे उनका दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो चुका है।

ग्रामीणों ने बताया कि जब पानी सप्लाई से जुड़े कर्मचारी से इस गंभीर समस्या को लेकर सवाल किया गया तो उसने साफ शब्दों में कह दिया कि करीब 18 महीने का भुगतान बकाया होने के कारण पानी सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कर्मचारी के इस बयान ने ग्रामीणों में और ज्यादा आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि भुगतान विवाद का खामियाजा आखिर आम जनता को क्यों भुगतना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार. सरपंच संतों की देवी गुर्जर, जल विभाग गंगापुर और क्षेत्रीय विधायक लादू लाल पितलिया को शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार आश्वासन तो दिया जाता है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

🚰 महिलाओं और बच्चों पर सबसे ज्यादा असर

पानी की समस्या का सबसे ज्यादा असर गांव की महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। महिलाओं को रोजाना कई चक्कर लगाकर पानी लाना पड़ रहा है। इससे उनकी घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। वहीं बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है, क्योंकि कई बार उन्हें भी पानी लाने में सहयोग करना पड़ता है।

खेती पर मंडराया संकट, किसानों की बढ़ी चिंता

पानी की कमी का असर अब गांव की खेती पर भी साफ दिखाई देने लगा है। किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है, वहीं पशुओं के लिए चारे का संकट भी गहराने लगा है। यदि जल्द पानी की व्यवस्था नहीं हुई तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। कई किसानों ने चिंता जताई है कि इस बार फसल खराब होने से उनकी आजीविका पर गंभीर संकट आ सकता है।

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