प्रस्तावित सांध्यकालीन न्यायालय संचालन का किया विरोध

भीलवाड़ा |जिला अभिभाषक संस्था अध्यक्ष उम्मेद सिंह राठौड़, उपाध्यक्ष महिपाल सिंह राणावत, महासचिव पंकज दाधीच, रेवेन्यू महासचिव मनोहर लाल बुनकर, कोषाध्यक्ष रवि गोरानी, सहसचिव आदित्य सिंह चौहान, पुस्तकालय सचिव प्रताप तेली के नेतृत्व मे अधिवक्ताओ ने मुख्य न्यायाधीश जोधपुर को जिला एवं सैशन न्यायाधीश के मार्फ़त ज्ञापन सौपकर प्रस्तावित सांध्यकालीन न्यायालय संचालन पर पुनर्विचार कर इसे जल्द बंद कराया जाना सुनिश्चित करने की मांग की है|
अध्यक्ष राठौड़ ने बताया कि वर्तमान मे विचाराधीन प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के उद्देश्य से सांध्यकालीन न्यायालय के संचालन की व्यवस्था की जा रही है| न्यायिक प्रक्रिया मे शीघ्रता का उद्देश्य निश्चित रूप से सराहनीय है किन्तु इस व्यवस्था के कारण अधिवक्ता एवं पक्षकारो को गंभीर व्यावहारिक सुरक्षा तथा संवेधानिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है|
अधिकांश पक्षकार एवं अधिवक्ता दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रो एवं कस्बो से यात्रा कर न्यायालय आते है| सांध्यकालीन समय मे न्यायालय की कार्यवाही समाप्त होने पर यात्रा करनी पडती है और सडक दुर्घटनाओ की आशंका अत्यधिक बढ़ जाती है| सार्वजानिक परिवहन की उपलब्धता सिमित हो जाती है यह स्थिति जीवन एवं व्यक्तिगत सुरक्षा अनुच्छेद के अधिकार के प्रतिकूल है|
जहा न्यायिक कर्मचारी एवं अधिकारी अवकाश ले सकते है वही अधिवक्ताओ के लिये कोई वेधानिक अवकाश व्यवस्था नहीं है, अनुपस्थिति पर प्रकरण की पैरवी प्रभावित होती है मुवक्कील के हितो को क्षति पहुँचती है अधिवक्ता न्यायालय के अधिकारी होते हुए भी इस व्यवस्था मे असमानता का शिकार हो रहे है| कार्य-जीवन संतुलन और पेशेगत गरिमा का प्रश्न अधिवक्ता सुबह से नियमित कार्यों मे संलग्न रहते है| सांध्यकालीन न्यायालय शारीरिक व मानसिक थकान बढ़ाता है तैयारी व शोध के समय को प्रभावित करता है अधिवक्ता की पेशेगत गरिमा के प्रतिकूल है बिना परामर्श के निर्णय प्राकृतिक न्याय के विपरीत सांध्यकालीन न्यायालय के संचालन से पूर्व अधिवक्ता समुदाय से समुचित परामर्श नहीं किया गया, अधिवक्ताओ की सहमति नहीं ली गई जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतो के विपरीत है| इसलिए सम्पूर्ण अधिवक्ता समुदाय प्रस्तावित सांध्यकालीन न्यायालय संचालन का पुरजोर विरोध करते है|
ज्ञापन के दौरान विक्रम सिंह राठौड़, राजेंद्र कचौलिया, हेमेंद्र शर्मा, राजेश शर्मा, दुर्गेश शर्मा, मोहम्मद फ़रजन अशोक जैन, श्याम सिंह चुण्डावत, भूपेंद्र सिंह कानावत, बाबू लाल आचार्य, राकेश जैन, रामपाल शर्मा, उदयलाल बोराणा, गोपाल सोनी, पंकज शर्मा, नरेन्द्र सिंह राठौड़, युवराज चंदेल सहित कई अधिवक्तागण मौजूद रहे|
