वास्तविक कर्म केवल भगवत सेवा, बाकी कर्म तो पशु भी करते हैं: महंत मोहनशरणC

भीलवाड़ा । ग्रीन पार्क स्थित 'श्री कुंज' के भव्य पांडाल में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को भक्ति और ज्ञान का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास महंत मोहनशरण शास्त्री (वृंदावन) ने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को परिभाषित करते हुए कहा कि इस संसार में सर्वश्रेष्ठ वस्तु केवल 'भगवान' हैं और मनुष्य का एकमात्र वास्तविक कर्म 'भगवान की सेवा' करना है। महंत ने जोर देकर कहा, "वास्तविक कर्म केवल भगवत सेवा ही है, बाकी आहार-निद्रा और संतान उत्पत्ति जैसे कर्म तो पशु-पक्षी भी करते हैं। मंदिर जाकर दर्शन करना और ईश्वर की सेवा में समय देना ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाता है।" कपिल-देवहूति संवाद की व्याख्या करते हुए शास्त्री जी ने बताया कि जब आप संत सेवा में लीन होते हैं, तो भगवान स्वयं कृपा करते हैं। उन्होंने कहा कि संसार में सब कुछ नश्वर है, केवल हरि नाम ही शाश्वत है। भगवान कपिल ने अपनी माता देवहूति को उपदेश देते हुए सिखाया कि ममता और मोह को त्यागकर परमात्मा में मन लगाना ही जीवन की असली सार्थकता है। उपदेशों के दौरान पूरा पांडाल 'जय नारायण' के जयकारों से गूंज उठा। सर्दी के बावजूद पांडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। आयोजन प्रमुख शंभूदयाल व प्रहलाद सोनी ने बताया कि कथा के दौरान शिव पार्वती की सजीव झांकी भी सजाई गई। विश्वबंधु सिंह राठौड़, जितेंद्र वर्मा, अर्जुन पंवार, नीलम गुप्ता, रीता तिवारी, मंजू मोदानी, हरकलाल, विनोद ओझा, दूर्गेश सोनी आसींद, एक्युप्रेशर विशेषज्ञ देवानंद भाई महावीर प्रसाद सोनी, गोवर्धन सोनी, कैलाश सोनी गंगापुर, शिव सोनी कोटड़ी, चांदमल सोनी नेथावल, जगदीश जंगवाल, प्रकाश सोनी, गुणवंत सोनी गंगापुर, भाजपा पूर्व नगर अध्यक्ष कन्हैयालाल स्वर्णकार, विष्णु सोनी, मुरली सोनी, बालूलाल सोनी, नारायणलाल जवड़ा, चांदमल सोनी ने व्यास पीठ का पूजन कर आशीर्वाद लिया। आयोजन समिति के श्याम सुंदर और अक्षत सोनी ने व्यवस्थाओं की कमान संभाली। शनिवार को कथा के तीसरे दिन ध्रुव चरित्र, जड़ भरत चरित्र और भगवान नृसिंह के प्राकट्य का प्रसंग सुनाया जाएगा। साथ ही, गोवत्स शिव प्रकाश शास्त्री द्वारा तीन दिवसीय 'नानी बाई का मायरा' का विशेष आयोजन भी 7.30 से 9.30 बजे होगा। मंच संचालन हंसा व्यास ने किया।
