पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल:: पुर में आचार्य समाज ने गोबर के कंडों से की होली की स्थापना

पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल: पुर में आचार्य समाज ने गोबर के कंडों से की होली की स्थापना
पुर (भीलवाड़ा)। पर्यावरण प्रदूषण और हरे वृक्षों की कटाई को रोकने के लिए पुर उपनगर के आचार्य समाज ने एक सराहनीय और अनुकरणीय पहल की है। समाज ने इस वर्ष भी रासायनिक पदार्थों और लकड़ी के बजाय शुद्ध रूप से गोबर के कंडों से होली जलाने का निर्णय लिया है। इसी संकल्प के तहत आज आचार्यों की हथाई के पास गोबर के कंडों से होली की स्थापना की गई।
1100 कंडों से प्रज्ज्वलित होगी 'इको-फ्रेंडली' होली
आचार्य समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले वर्ष की सफलता के बाद इस बार भी पर्यावरण की रक्षा हेतु यह कदम उठाया गया है। होली के दिन 1100 कंडों का उपयोग कर होलिका दहन किया जाएगा। समाज का उद्देश्य बिना किसी को नुकसान पहुँचाए और प्रदूषण फैलाए बुराई पर अच्छाई की जीत का यह पर्व मनाना है। इस निर्णय से न केवल पेड़ों की कटाई रुकेगी, बल्कि रबड़ के टायरों से फैलने वाले जहरीले धुएं से भी मुक्ति मिलेगी।
असामाजिक तत्वों पर नजर, प्रशासन से पाबंद करने की मांग
समाज ने इस दौरान सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई है। कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा जानबूझकर हरे वृक्ष काटने और रबर के टायर जलाकर माहौल बिगाड़ने की आशंका को देखते हुए समाज ने प्रशासन को सूचित करने का निर्णय लिया है। समाज की मांग है कि ऐसे तत्वों को समय रहते पाबंद किया जाए ताकि आसपास के घरों को नुकसान न पहुंचे और सामाजिक सद्भावना बनी रहे।
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