पिता को पहनाया मेडल तो खुसी के मारे छलक उठी आंखे कहा के गर्व का पल है

भीलवाड़ा |बरसनी -कोलकाता में आयोजित 51वीं राष्ट्रीय जूनियर कबड्डी चैंपियनशिप में राजस्थान टीम की ओर से खेलते हुए कांस्य पदक (ब्रॉन्ज मेडल) जीतने वाली होनहार खिलाड़ी नीतू आचार्य के गांव लौटने पर बरसनी क्षेत्र में हर्ष और गौरव का माहौल देखने को मिला। राजस्थान टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया। गांव बरसनी पहुंचते ही चारभुजा मंदिर पर ग्रामीणों, युवाओं एवं खेल प्रेमियों द्वारा नीतू आचार्य का माल्यार्पण कर ढोल-नगाड़ों के साथ जोरदार स्वागत किया गया। इस ऐतिहासिक क्षण पर बेटी की सफलता देखकर पिता सोहन लाल आचार्य की आंखें खुशी से छलक उठीं। उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा गर्व बताया। नीतू आचार्य ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने पिता सोहन लाल आचार्य और जिला सचिव एवं कोच शंकर लाल खटीक को दिया। उन्होंने कहा,
“पिता के जोश और जुनून ने मेरे हौसलों को पंख दिए। उन्हीं की प्रेरणा से मैं 12 बार राज्य स्तर पर खेल पाई और आज राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने का अवसर मिला।” नीतू के पिता सोहन लाल आचार्य ने बताया कि बचपन से ही नीतू में कबड्डी के प्रति गहरी रुचि रही है। “हर रोज सुबह जल्दी उठकर दौड़ लगाना और नियमित अभ्यास करना उसकी दिनचर्या रही है। शुरू से सपना था कि बेटी नेशनल खेले—आज वह सपना साकार हुआ है। अगर हौसले बुलंद हों तो इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है,”उन्होंने भावुक होकर कहा। ग्राम पंचायत रूपपुरा-बरसनी के मालमपुरा की रहने वाली नीतू आचार्य ने यह साबित कर दिया है कि गांवों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं, जरूरत है तो सिर्फ सही मार्गदर्शन और अवसर की। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र की कई बालिकाओं में खेलों के प्रति नया उत्साह, आत्मविश्वास और प्रेरणा देखने को मिल रही है।
