अमेरिका-ईरान युद्धविराम: डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने की तैयारी, होर्मुज में 'युआन' से वसूली करेगा ईरान

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए हुआ युद्धविराम (Ceasefire) केवल सैन्य शांति का संकेत नहीं है, बल्कि यह वैश्विक वित्तीय प्रणाली में एक बड़े बदलाव की शुरुआत भी हो सकता है। एक महीने से अधिक समय तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल मचाने वाले इस संकट के थमते ही अब ईरान और चीन इस मौके का फायदा उठाकर अमेरिकी डॉलर के दबदबे को चुनौती देने की तैयारी में हैं।
डॉलर के वर्चस्व पर प्रहार
दशकों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर का एकछत्र राज रहा है। साल 2023 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के लगभग 80 प्रतिशत व्यापारिक लेन-देन डॉलर में ही हुए। वॉशिंगटन ने अक्सर अपनी मुद्रा के इस दबदबे का इस्तेमाल ईरान और चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों पर प्रतिबंध लगाने और दबाव बनाने के लिए किया है। अब तेहरान और बीजिंग इस 'डॉलर कूटनीति' का तोड़ निकालने में जुट गए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना युआन का हथियार
दुनिया के लगभग 20% तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LPG) की आपूर्ति 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से होती है, जिस पर ईरान का रणनीतिक नियंत्रण है। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले हर कमर्शियल जहाज से 2 मिलियन डॉलर की 'ट्रांजिट फीस' वसूलने का एलान किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान यह राशि डॉलर के बजाय चीनी युआन में लेगा।
चीन-ईरान के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग
ईरानी अधिकारियों द्वारा शुरू किया गया यह 'टोल बूथ' जैसा सिस्टम सीधे तौर पर चीनी मुद्रा युआन को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने की कोशिश है। यदि यह सफल रहता है, तो वैश्विक तेल व्यापार में डॉलर की निर्भरता कम होगी और चीन-ईरान का आर्थिक गठजोड़ वैश्विक वित्तीय बाजार में अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्धविराम की यह अवधि इन दोनों देशों को अपनी साझा वित्तीय पकड़ मजबूत करने का सुनहरा अवसर दे रही है।
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