रेपो रेट कट के बाद भी महंगे हुए नए लोन, बैंकों के मार्जिन पर दबाव

रेपो रेट कट के बाद भी महंगे हुए नए लोन, बैंकों के मार्जिन पर दबाव
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भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट में कटौती के बावजूद आम लोगों के लिए नए कर्ज सस्ते नहीं हुए हैं। बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी और छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कटौती न होने के कारण बैंक अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट दरें घटाने की स्थिति में नहीं हैं। इसका सीधा असर बैंकों के मुनाफे पर पड़ रहा है, जिसकी भरपाई के लिए बैंक नए लोन को महंगा कर रहे हैं।

बैंकों की स्थिति यह है कि एक ओर उन्हें जमा पर ऊंचा ब्याज देना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर लोन पर ब्याज घटाने की गुंजाइश सीमित हो गई है। हालांकि, पहले से चल रहे अधिकतर लोन पर रेपो रेट कट का फायदा ग्राहकों को दिया गया है, लेकिन नए लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। खासतौर पर सरकारी बैंक अपनी आय बनाए रखने के लिए ज्यादा ब्याज वाले रिटेल लोन पर जोर बढ़ा रहे हैं।

इसका असर यह हुआ है कि होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसे आम कर्ज अब पहले के मुकाबले ऊंची ब्याज दर पर मिल रहे हैं। आरबीआई की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वाणिज्यिक बैंकों की नए लोन की वेटेड एवरेज लेंडिंग रेट नवंबर में बढ़कर 8.71 प्रतिशत हो गई, जो सितंबर में 8.39 प्रतिशत थी। अक्टूबर और नवंबर, दोनों महीनों में नए ऋणों की ब्याज दरों में इजाफा दर्ज किया गया है।

बॉन्ड मार्केट में भी दबाव बना हुआ है। 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड में अक्टूबर के दौरान करीब 30 आधार अंक की बढ़ोतरी हुई, जबकि जून के बाद से इसमें और तेजी देखी गई है। इसका असर भी बैंकों की फंडिंग लागत पर पड़ रहा है।

दूसरी ओर, छोटी बचत योजनाओं में निवेश लगातार बढ़ रहा है। इन योजनाओं में फॉर्मूला रेट से 1.44 प्रतिशत तक ज्यादा ब्याज मिल रहा है, जिससे निवेशक बैंक एफडी की बजाय इन विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे बैंकों में डिपॉजिट का दबाव बढ़ गया है और वे एफडी की दरें घटाने से बच रहे हैं।

आरबीआई की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि नवंबर में गोल्ड लोन में सालाना आधार पर 125 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी हुई है। सोने की कीमतों में तेजी के चलते लोग बड़ी संख्या में गोल्ड लोन ले रहे हैं, जिससे बैंकों के रिटेल लोन पोर्टफोलियो में इसका हिस्सा तेजी से बढ़ा है।

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