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बड़े भाग से बेटियाँ

बड़े भाग से बेटियाँ

नमन-मगसम पटल 

*बड़े भाग से जनम घरों में,*
*ले पाती है बेटियाँ/*
*बड़े नाज़ से पनप घरों में ,*
*वे जाती हैं बेटियाँ//*

बचपन से सिखलाया जाता,
लड़की हो कुछ शर्म करो/
घर जा कर भी आप पराये,
बेटी सहना धर्म करो//

बड़े त्याग से लगन लगा के,
जी पाती है बेटियाँ/
कई आग से बदन जला के,
मिट जाती है बेटियाँ//

*बड़े भाग से जनम घरों में,*
*ले पाती है बेटियाँ/*
*बड़े नाज़ से पनप घरों में ,*
*वे जाती हैं बेटियाँ//*

कोई लक्ष्मी बन कर वामा,
वे भाग बदल देती हैं,
नन्ही सी गृहस्थी को स्त्रियाँ,
स्वर्ग की शकल देती है//

बड़े जाग से मगन घरों में,
रह पाती है बेटियाँ/
कड़े राग और दमन सुरों में,
सह जाती है बेटियाँ//

*बड़े भाग से जनम घरों में,*
*ले पाती है बेटियाँ/*
*बड़े नाज़ से पनप घरों में ,*
*वे जाती हैं बेटियाँ//*