हाईकोर्ट में याचिका दायर,: ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित तीन साल की बच्ची कैसे दे सकती है संथारा की सहमति

ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित तीन साल की बच्ची कैसे दे सकती है संथारा की सहमति
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इंदौर। जैन परिवार की साढ़े तीन वर्षीय बच्ची वियाना के संथारा का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में प्रांशु जैन ने एडवोकेट शुभम शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें कहा है कि इतनी कम उम्र की बच्ची संथारा जैसे गंभीर निर्णय की सहमति कैसे दे सकती है। याचिका में कहा गया है कि जैन धर्म में संथारा के लिए संथारा लेने वाले की सहमति अनिवार्य होती है।

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वियाना की आयु तीन वर्ष चार माह थी और वह ब्रेन ट्यूमर की गंभीर बीमारी से पीड़ित थी। वह कोई निर्णय लेने की स्थिति में थी ही नहीं। ऐसे में वह संथारा की सहमति कैसे दे सकती है? याचिका में मांग की गई है कि अवयस्क और मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चों के संथारा पर रोक लगाई जाए और ऐसे बच्चों को संथारा दिलवाने वालों पर कार्रवाई की जाए।

माता-पिता को पक्षकार बनाने का आदेश

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्क सुनने के बाद याचिका में वियाना के माता-पिता को पक्षकार बनाने के आदेश दिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि वे बताएं कि वह कौन-सा एसोसिएशन है, जिसने वियाना के माता-पिता को उत्कृष्टता का गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स प्रमाण पत्र प्रदान किया था। इंदौर के पीयूष और वर्षा जैन की लगभग साढ़े तीन वर्षीय बेटी वियाना को 21 मार्च को संथारा दिलवाया गया था।

मां ने खुद यह बात मीडिया से साझा की

मई के पहले सप्ताह में वियाना की मां वर्षा ने खुद यह बात मीडिया से साझा की थी। उन्होंने बताया था कि वियाना को जनवरी 2025 में ब्रेन ट्यूमर होने का पता चला था। नौ जनवरी को उसे मुंबई ले जाया गया। वहां ट्यूमर का ऑपरेशन होने के बाद वह ठीक होने लगी थी, लेकिन मार्च 2025 के तीसरे सप्ताह में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। ऐसी स्थिति में हम वियाना को 21 मार्च को राजेश मुनि महाराज के पास ले गए।

एक रात गुजारना भी मुश्किल

उन्होंने कहा कि इसका एक रात गुजारना भी मुश्किल लग रहा है। इसे संथारा करा देना चाहिए। हमने संथारा की सहमति दे दी। गुरुदेव ने संथारा की प्रक्रिया पूरी कराई। संथारा लेने के मात्र 10 मिनट बाद ही वियाना का निधन हो गया। वियाना के स्वजन ने बताया था कि गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने उसे दुनिया की सबसे कम उम्र की संथारा व्रती के रूप में प्रमाणित भी किया है।

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