छत्रपति संभाजी नगर: विभिन्न राज्यों की संस्कृति से महका महाराष्ट्र, वारसा सह्याद्रीचा का भव्य आयोजन

छत्रपति संभाजी नगर: विभिन्न राज्यों की संस्कृति से महका महाराष्ट्र, वारसा सह्याद्रीचा का भव्य आयोजन
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छत्रपति संभाजी नगर , एमआयटी हॉल में केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय के पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर और सांस्कृतिक कार्य संचालनालय, मुंबई द्वारा आयोजित दो दिवसीय वारसा सह्याद्रीचा कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस आयोजन में सात राज्यों की लोक संस्कृति, नृत्य और संगीत की अनूठी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।




पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर के निदेशक फुरकान खान ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश की विविध सांस्कृतिक विरासत को महाराष्ट्र के लोगों तक पहुंचाना है। पहले दिन डेजर्ट सिम्फनी में राजस्थान के खरताल, पुंगी, चौतारा, कामायचा, सारंगी, मटका, बाजा, ढोलक, मोरचंग, कच्छ की वीणा, जोड़िया पावा, गमेलू, मंजीरा और महाराष्ट्र की नाळ व तुतारी की प्रस्तुति ने श्रोताओं को झुमा दिया। इसके बाद संतोष नायर द्वारा निर्देशित कोरियोग्राफी में महाराष्ट्र के गोंधळ, लावणी, गोवा के समई, राजस्थान के चरी व कालबेलिया, गुजरात के राठवा व सिद्दी धमाल, मणिपुर के पुंग ढोल चोलम, पश्चिम बंगाल के नटुआ और पंजाब के भांगड़ा नृत्यों ने दर्शकों का मन मोह लिया। हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से कई बार गूंज उठा।

मराठी लोकगायक गणेशचंदन शिवे की भारूड प्रस्तुति ने 16वीं सदी की संत एकनाथ की उपदेशात्मक शैली को जीवंत कर नैतिक व दार्शनिक संदेशों से दर्शकों का दिल जीता।




मंगलवार का कार्यक्रम:

19 अगस्त को कथक नृत्यांगना शमा भाटे अपने प्रसिद्ध कथक बैले कृष्णा द लिबरेटर में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों और पर्यावरण प्रेम को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करेंगी। इसके अलावा म्यूजिकल सिम्फनी, कोरियोग्राफ और नृत्यांगना प्रमिला सूर्यवंशी की लावणी नृत्य की प्रस्तुति दर्शकों का मनोरंजन करेगी।

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