खरगोन में शासकीय स्कूल के शिक्षक ने कान पकड़कर लगाई उठक-बैठक, फिर लिखा माफीनामा, जानें मामला

खरगोन में शासकीय स्कूल के शिक्षक ने कान पकड़कर लगाई उठक-बैठक, फिर लिखा माफीनामा, जानें मामला
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मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के बिस्टान क्षेत्र में स्थित सरकारी संदीपनी स्कूल (सांदीपनी विद्यालय) में हाल ही में एक विवादास्पद घटना घटी, जिसमें एक मुस्लिम अतिथि शिक्षक शाहरुख पठान पर छात्रों को धार्मिक प्रतीकों (जैसे माथे पर तिलक, हाथ में कलावा या रक्षा सूत्र, और गले में रुद्राक्ष) पहनने या लगाने से रोकने के आरोप लगे। यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, शिक्षा में धर्मनिरपेक्षता और सामुदायिक तनाव के मुद्दों को उजागर करता है। घटना 1 सितंबर 2025 को हुई, और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे स्थानीय स्तर पर बहस छिड़ गई।

घटना का क्रम:

आरोपों की शुरुआत:

अतिथि शिक्षक शाहरुख पठान (कक्षा 9वीं और कक्षा 2 के लिए नियुक्त) पर आरोप है कि उन्होंने छात्रों को धार्मिक प्रतीकों के उपयोग पर आपत्ति जताई। कथित तौर पर उन्होंने छात्रों से कहा कि ये प्रतीक अनावश्यक हैं और स्कूल में समानता बनाए रखने के लिए इन्हें न पहनें। कुछ रिपोर्ट्स में उल्लेख है कि उन्होंने छात्रों को अपशब्द भी कहे। यह टोका-टाकी पिछले एक माह से चल रही थी, लेकिन 1 सितंबर को यह चरम पर पहुंच गई।

छात्रों ने इसकी शिकायत अभिभावकों और स्थानीय हिंदू संगठनों से की।

विरोध प्रदर्शन:

सकल हिंदू समाज (एक स्थानीय हिंदू संगठन) के सदस्यों और छात्रों की बड़ी संख्या स्कूल पहुंची। उन्होंने नारेबाजी की, "भारत माता की जय" के नारे लगाए, और शिक्षक को हटाने की मांग की।

प्राचार्य बलराम भंवर उपलब्ध न होने पर, उन्होंने परीक्षा प्रभारी जितेंद्र चौहान से लिखित शिकायत दर्ज कराई।

विरोधकर्ताओं ने शिक्षक शाहरुख पठान को कक्षा से बुलाया और सार्वजनिक रूप से उनसे कान पकड़कर उठक-बैठक (सिट-अप्स) लगवाई। साथ ही, उनसे मौखिक माफी मंगवाई और लिखित माफीनामा लिया।

वीडियो वायरल:

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैला, जिसमें शिक्षक को अपमानित होते दिखाया गया है। कुछ पोस्ट्स में इसे "अल्पसंख्यक उत्पीड़न" बताया गया, जबकि अन्य ने इसे "धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा" कहा।

पक्षों के बयान:

विरोधकर्ताओं का पक्ष: सकल हिंदू समाज के पदाधिकारी (जैसे भूपेंद्र राठौर, लोकेन्द्र राजपूत, मोहित वर्मा, पृथ्वी राजपूत, आकाश ठाकुर) का कहना है कि शिक्षक की हरकत छात्रों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रही थी। उन्होंने इसे "धार्मिक भेदभाव" का रूप बताया और शिक्षक की तत्काल बर्खास्तगी की मांग की। उनका तर्क था कि स्कूल में हिंदू छात्रों को अपनी परंपराओं का पालन करने का अधिकार है।

शिक्षक का पक्ष: शाहरुख पठान ने कथित तौर पर माफी मांग ली, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में उनका पक्ष यह सामने आया कि उनका उद्देश्य छात्रों में समानता और भाईचारा बढ़ाना था, न कि धार्मिक हस्तक्षेप। स्कूल स्टाफ ने भी कहा कि शिक्षक का मकसद धार्मिक भेदभाव कम करना था।

स्कूल प्रशासन का पक्ष: प्राचार्य बलराम भंवर ने कहा कि छात्रों से मिली लिखित शिकायत के आधार पर अतिथि शिक्षक को हटाने का प्रस्ताव शाला समिति की बैठक में चर्चा कर सहायक आयुक्त को भेजा जाएगा। 3 सितंबर 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षक की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।

अपडेट और प्रभाव:

शिक्षक की बर्खास्तगी: 3 सितंबर 2025 को खबर आई कि शाहरुख पठान की अतिथि शिक्षक पद से सेवाएं समाप्त हो गईं। जिला शिक्षा विभाग ने जांच शुरू की है, लेकिन आधिकारिक बयान अभी स्पष्ट नहीं।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं:

कुछ यूजर्स (जैसे @TheOPHindi) ने इसे "हेट क्राइम" और "मोरल पोलिसिंग" बताया, जबकि अन्य (@vickeykeer7) ने हिंदू समाज के विरोध को सही ठहराया।

वीडियो में दिखाए गए दृश्यों से बहस तेज हो गई, जिसमें अल्पसंख्यक अधिकारों vs. धार्मिक प्रतीकों की स्वतंत्रता का मुद्दा उठा।

व्यापक संदर्भ: यह घटना मध्य प्रदेश के स्कूलों में धार्मिक प्रतीकों पर चल रही बहस का हिस्सा है। पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां शिक्षकों पर धार्मिक हस्तक्षेप के आरोप लगे। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्कूलों में धार्मिक प्रतीकों पर कोई सख्ती नहीं है, लेकिन अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।

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