अब चाँद से रोशन होगी धरती!: अंतरिक्ष में 'पावर हाउस' बनाने की तैयारी, बिना तार के पहुंचेगी बिजली

भीलवाड़ा। आने वाले समय में बिजली कटौती और महंगे कोयले की चिंता खत्म हो सकती है। दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां अब चंद्रमा (Moon) को एक विशाल 'इलेक्ट्रिक हाउस' में बदलने की तैयारी कर रही हैं। वैज्ञानिक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं जिससे चंद्रमा पर सौर ऊर्जा पैदा कर उसे बिना किसी तार (Wireless) के सीधे पृथ्वी पर भेजा जा सकेगा।
कैसे होगा यह चमत्कार?
वैज्ञानिकों की योजना के अनुसार, चंद्रमा की सतह पर विशाल सोलर पैनलों की एक श्रृंखला (Solar Array) बिछाई जाएगी।
* ऊर्जा का उत्पादन: चूंकि चंद्रमा पर वायुमंडल नहीं है, इसलिए वहां सूर्य की रोशनी पृथ्वी के मुकाबले कहीं अधिक तीव्र और लगातार मिलती है।
* लेजर और माइक्रोवेव तकनीक: वहां पैदा होने वाली बिजली को 'माइक्रोवेव' या 'लेजर बीम' में बदलकर धरती पर भेजा जाएगा।
* रिसीविंग स्टेशन: धरती पर बने विशेष एंटीना (Rectenna) इन किरणों को पकड़कर वापस बिजली में बदल देंगे, जिसे हमारे घरों तक सप्लाई किया जा सकेगा।
2026 तक बड़े मिशन की तैयारी:
* जापान और अमेरिका की रेस: जापान की 'शिमिजू कॉर्पोरेशन' और अमेरिका की कई निजी कंपनियां 2026 तक इसके प्रोटोटाइप (नमूने) का परीक्षण करने वाली हैं।
* इसरो (ISRO) की नजर: भारत का चंद्रयान मिशन भी चंद्रमा पर 'हीलियम-3' जैसे तत्वों की खोज कर रहा है, जो भविष्य में परमाणु ऊर्जा का बड़ा स्रोत बन सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह सफल रहा, तो बिजली की दरें 10 से 20 पैसे प्रति यूनिट तक गिर सकती हैं।
भीलवाड़ा के लिए क्या हैं मायने?
भीलवाड़ा जैसे औद्योगिक शहर (Vastra Nagri) के लिए, जहां टेक्सटाइल मिलों को भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है, यह तकनीक भविष्य में गेम-चेंजर साबित हो सकती है। सस्ती और अटूट बिजली मिलने से उद्योगों की लागत में भारी कमी आएगी।
चुनौतियां अभी भी बाकी:
हालांकि यह सुनने में किसी फिल्म जैसा लगता है, लेकिन अंतरिक्ष से हजारों किलोमीटर दूर बीम भेजना और उसे सुरक्षित रूप से रिसीव करना एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा अंतरिक्ष में इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की लागत भी काफी अधिक है।
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