नशे की भेंट चढ़ता बचपन और जवानी: सिरसा के ओटू गांव की रूह कंपा देने वाली हकीकत

सिरसा: नशा अब केवल एक बुरी आदत नहीं, बल्कि समाज के लिए एक ऐसा नासूर बन चुका है जो व्यवस्था की लापरवाही और सामाजिक चुप्पी के बीच तेज़ी से फैल रहा है। सिरसा जिले के ओटू गांव से सामने आई तस्वीरें और दास्तानें रूह कंपा देने वाली हैं, जहाँ युवा नशे के लिए इंसानियत की तमाम हदें पार कर रहे हैं।
खौफनाक सच: खून में घोल रहे हैं 'गुलाबी जहर'
ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नशे की लत इस कदर हावी है कि पानी उपलब्ध न होने पर युवा अपनी नसों से खून निकालकर उसमें नशीली गोलियां घोलते हैं और फिर उसी घातक मिश्रण को शरीर में इंजेक्ट कर लेते हैं। श्मशान घाट और सुनसान रास्तों पर रात के अंधेरे में मौत का यह खेल आम हो चुका है।
आंकड़ों में तबाही: 16 से 25 साल के 35 युवाओं की मौत
गांव के बुजुर्गों और प्रतिनिधियों ने बताया कि कोरोना काल के बाद से अब तक ओटू गांव के 35 से अधिक युवाओं की जान मेडिकल नशे के कारण जा चुकी है। मरने वालों की उम्र महज 16 से 25 वर्ष के बीच थी।
मुख्तियार सिंह (85 वर्ष) का दर्द: नशे ने उनके 19 साल के पोते की जान ले ली, जबकि दूसरा पोता नशामुक्ति केंद्र में भर्ती है। पोते को बचाने के लिए साढ़े चार लाख रुपये खर्च किए, पर वह नहीं बचा।
ताजा घटनाएं: बीते 23-24 अक्टूबर को एक ही दिन में दो युवकों, सुखचैन (20) और विक्की (19) की ओवरडोज से मौत हो गई।
सिस्टम की सुस्ती: खेल मैदान बना 'कूड़ाघर'
युवाओं को नशे की दलदल से बाहर निकालने के लिए 2017-18 में खेल मैदान की घोषणा हुई थी। पंचायत ने 2 एकड़ जमीन भी दी, लेकिन 9 साल बाद भी वहां मैदान की जगह कूड़ाघर बना हुआ है। अधिकारी इसे अब भी 'प्रक्रियाधीन' बता रहे हैं।
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