सब्जियों की बढ़ती कीमतों के लिए ममता ने केंद्र को ठहराया दोषी ,टास्क फोर्स को 10 दिन की समयसीमा दी

सब्जियों की बढ़ती कीमतों के लिए ममता ने केंद्र को ठहराया दोषी ,टास्क फोर्स को 10 दिन की समयसीमा दी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कृषि वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर नाराजगी जताई। उन्होंने केंद्र सरकार पर कृषि उपज की कीमतों पर नियंत्रण रखने में पूरी तरह विफल होने का आरोप लगाया। वहीं राज्य सचिवालय में एक बैठक की अध्यक्षता कर रही ममता बनर्जी ने संबंधित अधिकारियों को कृषि वस्तुओं की कीमतों में कमी लाने के लिए 10 दिन की समयसीमा दी है। उन्होंने कहा, "बढ़ी हुई आम लोगों की पहुंच से बहुत बाहर हो गई है।

पिछले साल की तुलना में सब्जियों की कीमतों में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। पश्चिम बंगाल सीएम ने बढ़ी हुई कीमतों को लेकर चिंता और नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कि आलू, प्याज, लहसुन, बैंगन, लौकी और खीरे की कीमतों में पिछले साल की तुलना में तेजी से वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, "मानसून आ गया है, लेकिन सब्जियों की कीमतें अभी भी बढ़ रही हैं। लोग बाजार जाने से डर रहे हैं, उनकी इस स्थिति को देखकर हमें चिंता हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वस्तुओं की कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गई हैं। केंद्र इस मूल्य वृद्धि को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल रहा है।" सीएम ममता बनर्जी ने बैठक में मौजूद अधिकारियों, व्यापारियों और अन्य हितधारकों से कहा, "मैं आपको 10 दिन की समयसीमा दे रही हूं, जिसके भीतर कीमतें कम होनी चाहिए।"


इस बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम, राज्य के कृषि मंत्री सोवनदेब चट्टोपाध्याय, मुख्य सचिव बी पी गोपालिका और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल थे। मुख्यमंत्री ने मूल्य वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए गठित राज्य टास्क फोर्स के सदस्यों को सब्जियों की बिक्री और उनकी कीमतों पर नजर रखने के लिए तुरंत राज्य के बाजारों का दौरा करने का निर्देश दिया। टास्क फोर्स में मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, एडीजी (कानून और व्यवस्था) और पुलिस आयुक्तों सहित शीर्ष पुलिस अधिकारी और नौकरशाह शामिल हैं। सीएम ममता बनर्जी ने कहा, "टास्क फोर्स के सदस्य नियमित रूप से बाजारों की निगरानी करेंगे और मुझे साप्ताहिक रिपोर्ट सौंपेंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि अतिरिक्त आलू को कोल्ड स्टोरेज में संग्रहीत नहीं किया जाना चाहिए और राज्य के लोगों की जरूरतों को पूरा किए बिना सब्जियों का निर्यात नहीं किया जाना चाहिए।

कीमतें बढ़ रही हैं तो इतनी अधिक मात्रा में भंडारण क्यों?

सीएम ने कहा, "वर्तमान में हम आलू की 45 लाख मीट्रिक टन क्षमता में से 30 लाख टन का भंडारण कर रहे हैं कोल्ड स्टोर में। जब सब्जियों की कीमतें बढ़ रही हैं, तो हमारे भंडारण में इतनी बड़ी मात्रा में आलू क्यों पड़ा हुआ है? उन्होंने निर्देशित किया कि कम से कम 25 प्रतिशत बचाकर रखें और बाकी को बाजार में जारी करें। आलू की निरंतर आपूर्ति होनी चाहिए। हम सीमा पर वाहनों की जांच भी करेंगे। हम अपने लोगों को वंचित नहीं कर सकते और आलू दूसरे देशों को नहीं भेज सकते।”

ये दिए निर्देश

सीएम बनर्जी ने कहा कि परिवहन लागत बचाने के लिए राज्य सरकार को नासिक से प्याज खरीदना बंद कर देना चाहिए। इसके बजाय स्थानीय उत्पादकों से सब्जी खरीदने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। प्याज उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर मुख्यमंत्री ने पूछा, “हमारे पास राज्य में 4,000 से अधिक प्याज के भंडार गृह हैं। व्यापारी हमारे स्थानीय किसानों से सब्जी क्यों नहीं खरीद रहे हैं?” उन्होंने पुलिस को आवश्यक कृषि उत्पादों की जमाखोरी पर कड़ी निगरानी रखने का भी निर्देश दिया। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कीमतें नियंत्रण से बाहर न हों। उन्होंने कहा, "बंगाल एसटीएफ, सीआईडी, आईबी और प्रवर्तन शाखा को इस पर नजर रखनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि जबरन वसूली में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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